हैदराबाद पुलिस ने नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी से सावधान किया
हैदराबाद, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। हैदराबाद में एक 72 वर्षीय महिला के साथ धोखाधड़ी के कारण 22 लाख रुपए की ठगी हो गई। धोखाधड़ी करने वालों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की धमकी दी और फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया। इसके बाद हैदराबाद पुलिस ने नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह जारी की है।
नामपल्ली निवासी इस महिला को सीबीआई अधिकारी होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति का वीडियो कॉल आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि अवैध ड्रग्स से भरा एक पार्सल पीड़िता के नाम पर दर्ज किया गया है और पीड़िता से जुड़ा एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है।
कॉल करने वाले ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया और महिला को गिरफ्तार करने की धमकी दी। जमानत राशि के बहाने पीड़िता को अलग-अलग खातों में कई रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। पीड़िता को कुल 22 लाख रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ।
इस घटना और कुछ अन्य मामलों के बाद पुलिस ने आम जनता को साइबर अपराधियों के जाल में न फंसने और सतर्क रहने की कड़ी सलाह दी है।
एम. श्रीनिवासुलु, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं एसआईटी) ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन हैदराबाद सिटी ने स्थानीय पुलिस स्टेशनों के समन्वय से डिजिटल अरेस्ट घोटालों और उनके तौर-तरीकों के बारे में नागरिकों को शिक्षित करने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम और घर-घर जाकर अभियान चलाए हैं, जिससे डिजिटल अरेस्ट के दर्ज मामलों की संख्या में कमी आई है। हालांकि, ऐसे कुछ मामले अब भी दर्ज किए जा रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा घोटाला है जिसका मकसद डर, छल और धमकी का इस्तेमाल करके पीड़ितों से पैसे वसूलना है। साइबर अपराधी पुलिस अधिकारियों, सीबीआई, ईडी, सीमा शुल्क, टीआरएआई या अन्य सरकारी अधिकारियों का रूप धारण करते हैं और निर्दोष नागरिकों को गिरफ्तारी, आपराधिक मुकदमा या खाता फ्रीज करने की धमकी देकर उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए 'जुर्माना' या 'सुरक्षा जमा' जमा करने के लिए मजबूर करते हैं।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, धोखेबाज फोन कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस या वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों से संपर्क करते हैं। वे दावा कर सकते हैं कि उनका मोबाइल नंबर, बैंक खाता, आधार कार्ड, पार्सल या पहचान पत्र किसी आपराधिक गतिविधि से जुड़ा हुआ है। कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी, एनसीबी, सीमा शुल्क या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी होने का दिखावा करता है। धोखेबाज नकली पहचान पत्र, जाली नोटिस, आधिकारिक दिखने वाले लेटरहेड, लोगो और मनगढ़ंत केस दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। वे वीडियो कॉल के बैकग्राउंड के लिए वर्दी के साथ एक नकली पुलिस स्टेशन बनाते हैं।
पीड़ित पर मादक पदार्थों की तस्करी, धन शोधन, आतंकवाद वित्तपोषण, अवैध लेन-देन, पहचान की चोरी या धन शोधन की जांच में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया जाता है। कुछ मामलों में, जालसाज दावा करता है कि पीड़ित के नाम पर अवैध पदार्थों से भरा एक पार्सल जब्त किया गया है।
--आईएएनएस
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