रायलसीमा को बदलने के लिए बागवानी केंद्र: सीएम नायडू
मदनपल्ले, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को घोषणा की कि 1 लाख करोड़ रुपए के निवेश से विकसित किए जाने वाले वैश्विक बागवानी केंद्र के माध्यम से रायलसीमा सूखे की भूमि से समृद्धि की भूमि में परिवर्तित हो जाएगी।
उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मिलकर अन्नामय्या जिले के मदनपल्ले में ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब और इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की आधारशिला रखी।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने भी इस कार्यक्रम को संबोधित किया। ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब परियोजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें अनुमानित 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा। इसमें से केंद्र सरकार 40,352 करोड़ रुपए का योगदान देगी, जबकि निजी क्षेत्र से 60,000 करोड़ रुपए का निवेश जुटाने के प्रयास किए जाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना अनंतपुर, अन्नामय्या, चित्तूर, कुरनूल, नंद्याल, श्री सत्य साईं, तिरूपति, कडप्पा, प्रकाशम और मार्कापुरम जिलों को कवर करेगी। इन 10 जिलों में फैले 303 मंडलों और 5,869 गांवों में स्थित 201 क्लस्टरों के माध्यम से विकास कार्य किए जाएंगे। सरकार की योजना बागवानी की खेती के मौजूदा 8.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को 6 लाख हेक्टेयर और बढ़ाकर कुल 14.41 लाख हेक्टेयर करने की है।
इस परियोजना का उद्देश्य बागवानी उत्पादन को वर्तमान 222 लाख टन से बढ़ाकर 435 लाख टन करना है, जिससे 9.6 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इस पहल के तहत, 9 लाख एकड़ का अतिरिक्त अय्याकट बनाया जाएगा, जबकि 4.3 लाख एकड़ में सिंचाई सुविधाओं को स्थिर किया जाएगा।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि सरकार रायलसीमा के किसानों की किस्मत बदलने के अपने वादे को पूरा कर रही है और सूखाग्रस्त क्षेत्र को समृद्धि की भूमि में बदल रही है।
उन्होंने कहा कि रायलसीमा के किसान अब सेब और स्ट्रॉबेरी से लेकर केले, एवोकाडो, कीवी और खजूर तक सब कुछ उगा सकते हैं, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के साथ, रायलसीमा एक वैश्विक "फलों के कटोरे" के रूप में उभरेगा।
--आईएएनएस
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