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कनाडा में बिल सी-9 पारित, हिंदू संगठन बोले- 'नफरत का सटीक जवाब'

 

ओटावा, 20 जून (आईएएनएस)। कनाडा ने धार्मिक घृणा, धमकी और कट्टरपंथी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से एक नया कानून पारित किया है। नया कानून लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करेगा। कई प्रमुख हिंदू संगठनों ने बिल सी-9 (कॉम्बैटिंग हेट एक्ट) को पारित किए जाने पर खुशी जताई।

शनिवार को 'कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' (सीओएचएनए) ने कहा कि यह कानून कनाडाई नागरिकों को धमकियों से निपटने में मदद करेगा। संगठन ने विशेष रूप से हाल के वर्षों में हिंदू समुदाय को कथित खालिस्तानी चरमपंथी धमकियों का सामना करने का मुद्दा उठाया।

शनिवार को एक्स पर साझा किए गए एक बयान में सीओएचएनए ने कहा, “धार्मिक नफरत और भेदभाव में चिंताजनक वृद्धि का सामना करने वाले समुदायों में से एक होने के नाते, हिंदू कनाडाई इन सुरक्षा उपायों का स्वागत करते हैं। उम्मीद है कि ये कदम धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित किए बिना सुरक्षा बढ़ाएंगे।”

संगठन ने कहा, "नए कानून के तहत धार्मिक स्थलों और सामुदायिक स्थलों तक पहुंच की सुरक्षा के लिए बबल-जोन जैसी व्यवस्था, साथ ही नफरत फैलाने वाले प्रतीकों से जुड़े प्रावधानों का विस्तार किया गया है। ये कनाडाई नागरिकों को धमकियों (जिसमें हिंदू समुदाय को निशाना बनाने वाली कथित खालिस्तानी चरमपंथी गतिविधियां शामिल है) से निपटने में मदद करेगा।"

वहीं, हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन (एचसीएफ) ने कनाडा सरकार से बिल सी-9 के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने और कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) द्वारा कथित खालिस्तानी चरमपंथी नेटवर्क्स पर कार्रवाई करने की अपील की।

एचसीएफ ने एक्स पर लिखा, “इस कानून के जरिए कनाडा ने एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा है। लाखों हिंदुओं, बौद्धों और जैन समुदायों के लिए शांति के पवित्र प्रतीक ‘स्वास्तिक’ शब्द को हटाकर इसके स्थान पर सही घृणा प्रतीक ‘हाकेनक्रॉइज’ को रखा गया है। यह बदलाव हमारे बहुसांस्कृतिक समाज के सटीकता, सम्मान और समावेशिता जैसे मूल्यों को दर्शाता है।”

संगठन ने कहा कि कनाडा भर के 100 से अधिक संगठनों ने इस बदलाव का समर्थन किया और यह परिणाम समुदायों के एकजुट होकर काम करने से संभव हुआ।

एचसीएफ ने यह भी कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है और वास्तविक सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब मजबूत कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

संगठन ने कहा, “हिंदू कनाडाई अब भी कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी समूहों (सीबीकेई) की ओर से लक्षित धमकियों का सामना कर रहे हैं, जो विदेशी संघर्षों को हमारे समुदायों तक लाने की कोशिश करते हैं। इन नेटवर्कों पर उत्पीड़न, तोड़फोड़, हिंसा का महिमामंडन और संगठित दुष्प्रचार अभियानों से जुड़े होने के आरोप हैं। बिल सी-9 कनाडा को मजबूत उपकरण देता है, लेकिन इन उपकरणों का इस्तेमाल भी जरूरी है।”

--आईएएनएस

केआर/