तमिलनाडु : भारी बारिश से मुल्लापेरियार बांध में बढ़ा पानी, जलस्तर 123 फीट पर पहुंचा
चेन्नई, 7 नवंबर (आईएएनएस)। मुल्लापेरियार बांध के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद बांध में पानी की आवक तेजी से बढ़ गई है, जिससे जलाशय का जलस्तर 123 फीट तक पहुंच गया है। इससे तमिलनाडु के पांच दक्षिणी जिलों के उन किसानों को राहत मिली है, जो अपर्याप्त मानसूनी बारिश के कारण पानी की कमी का सामना कर रहे थे।
बांध के जलग्रहण क्षेत्रों में रातभर हुई भारी बारिश के बाद बांध में आवक 634 क्यूसेक से बढ़कर 1,782 क्यूसेक हो गई।
जलाशय में वर्तमान में 3,163 मिलियन क्यूबिक फीट पानी है, जिससे कृषि और पेयजल आवश्यकताओं के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।
मुल्लापेरियार बांध केरल में तमिलनाडु की सीमा के पास स्थित है और यह थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम जिलों के लिए पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
इन जिलों में हजारों किसान धान और अन्य फसलों की खेती के लिए जलाशय से छोड़े गए पानी पर निर्भर हैं। इस साल, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अपर्याप्त बारिश ने सामान्य सिंचाई कार्यक्रम को बाधित कर दिया, जिससे अधिकारियों को धान की पहली खेती के मौसम के लिए पानी छोड़ने में देरी करनी पड़ी।
पानी मूल रूप से 1 जून को छोड़ा जाना था, लेकिन जलाशय में अपर्याप्त भंडारण के कारण पानी छोड़ने में दो महीने से अधिक की देरी हुई और यह 8 अगस्त तक टल गया।
स्थिति और खराब हो गई क्योंकि बांध के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश उम्मीद से कम रही, जिसके परिणामस्वरूप आवक में लगातार गिरावट आई।
नतीजतन, अधिकारियों ने उपलब्ध भंडारण को बचाने के लिए तमिलनाडु को पानी का डिस्चार्ज 800 क्यूसेक से घटाकर 400 क्यूसेक कर दिया, ताकि आवश्यक सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
हालांकि, पिछले कुछ दिनों में केरल के कुछ हिस्सों में लगातार बारिश ने स्थिति में काफी सुधार किया है। विशेष रूप से, रातभर हुई भारी बारिश के परिणामस्वरूप आवक में काफी वृद्धि हुई, जिससे जलाशय के जलस्तर में वृद्धि हुई।
बेहतर भंडारण स्थिति ने उन किसानों को काफी राहत दी है जो चल रहे कृषि मौसम के दौरान सिंचाई के पानी की उपलब्धता को लेकर चिंतित थे।
पांच लाभार्थी जिलों के किसान आशान्वित हैं कि निरंतर आवक से पर्याप्त पानी की आपूर्ति बनाए रखने और खेती में और बाधा को रोकने में मदद मिलेगी।
स्थिति जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश पर निर्भर बनी हुई है। वर्तमान गीले मौसम की स्थिति जारी रहने पर जलाशय के भंडारण में और सुधार की संभावना है।
अधिकारियों से उम्मीद है कि वे कृषि आवश्यकताओं और पेयजल की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए आवक, भंडारण और पानी छोड़ने की प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करेंगे।
--आईएएनएस
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