केरल में लोगों की दिल की धड़कनें तेज, अब सभी को मतगणना का इंतजार
तिरुवनंतपुरम, 2 मई (आईएएनएस)। सोमवार की सुबह करीब आने के साथ ही केरल का राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। सभी राजनीतिक दलों में बेचैनी और इंतजार का माहौल देखा जा रहा है, जो दलगत सीमाओं से परे महसूस किया जा रहा है।
सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के लिए यह एक अहम समय है। यह चुनाव उनके लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है, जिसमें यह तय होगा कि क्या वामपंथी दल लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर पाएंगे और इतिहास रच सकेंगे।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के लिए यह सत्ता में वापसी करने का एक अवसर है।
भारतीय जनता पार्टी के लिए लक्ष्य थोड़ा सीमित लेकिन महत्वपूर्ण है। 2021 में अपनी एकमात्र सीट गंवाने के बाद वह फिर से अपनी जीत दर्ज करना चाहती है और अगर उसे अच्छा समर्थन मिलता है, तो अपने प्रभाव को और बढ़ाने की कोशिश करेगी।
वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू होगी, जिसमें सबसे पहले पोस्टल और सर्विस वोटों की गिनती की जाएगी। इसके बाद सुबह 8:30 बजे तक ईवीएम में पड़े वोटों की गिनती भी शुरू हो जाएगी, जिससे शुरुआती रुझान सामने आने लगेंगे। ये रुझान ही आगे पूरे दिन की स्थिति का संकेत दे सकते हैं।
शनिवार की सुबह सामान्य राजनीतिक बातचीत में भी तनाव का असर साफ महसूस किया जा सकता था। लगातार तीसरी जीत की कोशिश में राज्य के मत्स्य मंत्री साजी चेरियन ने अपनी जीत को लेकर पूरा भरोसा जताया। फिर भी, अपनी व्यक्तिगत उम्मीदों से आगे बढ़कर वे वामपंथ के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियों पर अधिक ध्यान देते नजर आए।
सुबह की अपनी रोज़ाना की कॉफी के दौरान जब वे जान-पहचान वालों से मिले, तो चेरियन ने बार-बार एक ही सवाल पूछा, “क्या लेफ्ट सत्ता में वापस नहीं आएगा?”
अक्सर शब्दों के बजाय मुस्कुराहट से दिए गए ये जवाब उस अनिश्चितता को दिखाते थे, जो अब इस चुनाव की खास पहचान बन गई है।
नेताओं के सार्वजनिक रूप से आत्मविश्वास जताने के बावजूद किसी स्पष्ट और निर्णायक संदेश की कमी ने सभी पक्षों में संदेह की स्थिति पैदा कर दी है।
अगर चेरियन अपनी चेंगन्नूर सीट से जीत जाते हैं, तो वे एक नया इतिहास रचेंगे। इसकी वजह उनका सरकारी घर, 'मनमोहन बंगला' है, जिसे लोग अशुभ मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी इस बंगले में रहता है, वह या तो अपना मंत्री पद का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता, या फिर दोबारा चुनाव हार जाता है। अगर चेरियन जीतते हैं, तो वे इस अंधविश्वास को तोड़ देंगे।
वामपंथ के लिए यह दांव ऐतिहासिक है। अगर वे लगातार तीसरी बार जीत हासिल करते हैं, तो यह केरल में लंबे समय से चले आ रहे चुनावी पैटर्न को बदल सकता है।
यूडीएफ के लिए यह मुकाबला मतदाताओं की सोच में आए बदलावों के आधार पर सत्ता में संभावित वापसी का संकेत माना जा रहा है।
इस बीच, भाजपा के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, ताकि उसके धीरे-धीरे बढ़ने के संकेतों को देखा जा सके।
जैसे ही मतगणना के दिन सुबह होती है, एक बात तय है कि लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं और दोपहर तक केरल को अपने सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सवाल का एक ज्यादा स्पष्ट जवाब मिल सकता है।
--आईएएनएस
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