'दिमागी नक्सल' टिप्पणी पर हन्नान मोल्लाह का पलटवार, किरेन रिजिजू को बताया 'मेंटल क्रिमिनल'
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) के नेता हन्नान मोल्लाह ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को लेकर की गई 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी के जवाब में रिजिजू को 'मेंटल क्रिमिनल' (मानसिक अपराधी) तक कह दिया।
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब किरेन रिजिजू ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए नसीरुद्दीन शाह को 'खतरनाक शहरी दिमागी नक्सल' बताया था।
रिजिजू ने अपनी पोस्ट में लिखा था, "मैं समझता था कि नसीरुद्दीन शाह सिर्फ एक साधारण अभिनेता हैं। मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था। मुझे नहीं पता था कि वह एक खतरनाक शहरी दिमागी नक्सल हैं। मुझे उनके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला। वह भारत के लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक हैं।"
आईएएनएस से बातचीत में हन्नान मोल्लाह ने रिजिजू की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम, लोकतंत्र, संविधान और मौलिक अधिकारों की समझ नहीं है।
मोल्लाह ने कहा, "किरेन रिजिजू अपनी ही सोच में रहते हैं। उन्हें भारत की आजादी, लोकतंत्र और संविधान की कोई समझ नहीं है।"
उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह एक प्रतिष्ठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले अभिनेता हैं। यदि उन्होंने जेनजी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए थी, न कि उन पर व्यक्तिगत हमले किए जाने चाहिए थे।
मोल्लाह ने आरोप लगाया कि जो लोग सरकार से सवाल पूछते हैं या गलत कामों के खिलाफ बोलते हैं, उन्हें 'ब्रेनवॉश्ड नक्सल' कहा जा रहा है। जो लोग एजेंट, चापलूस, खुशामदी और अंधभक्त की तरह काम करते हैं, वे मानसिक रूप से बीमार या 'मेंटल क्रिमिनल' हैं। आज देश में लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। नसीरुद्दीन शाह को 'ब्रेनवॉश्ड नक्सल' कहा जा रहा है, जबकि किरेन रिजिजू को मैं 'दिमागी पागल' कहता हूं।"
भाजपा पर निशाना साधते हुए मोल्लाह ने आरोप लगाया कि जो लोग सत्तारूढ़ दल से सवाल पूछते हैं, उन्हें अपमानजनक नामों से पुकारा जाता है। अब भाजपा में स्थिति ऐसी हो गई है कि दुष्कर्म करो और सांसद बन जाओ। लोग इसके खिलाफ बोलेंगे ही। जो भी सवाल उठाता है, उसे 'दिमागी नक्सल' कहा जाता है।
वहीं, कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी इस मामले में भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा, "जो भी व्यक्ति ऐसी बात कहता है, जो भाजपा को पसंद नहीं आती, उसे अलग-अलग नाम दे दिए जाते हैं। कभी 'टुकड़े-टुकड़े गैंग', कभी 'अर्बन नक्सल' और अब 'दिमागी नक्सल'। यह उनका काम करने का तरीका है। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि वे लोगों को ऐसे नामों से बुलाते हैं।"
--आईएएनएस
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