गुजरात-ताइवान साझेदारी मजबूत, सानंद-धोलेरा में बनेगा हाई-टेक इंडस्ट्रियल पार्क
गांधीनगर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। गुजरात ने उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में ताइवान के साथ अपने सहयोग को और गहरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसके तहत सानंद-धोलेरा क्षेत्र में भारत-ताइवान औद्योगिक पार्क स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए है। इस संबंध में अधिकारियों ने शुक्रवार को जानकारी दी।
गांधीनगर में हस्ताक्षरित यह समझौता प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क को विकसित करने के लिए राज्य सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और एलिजेंस इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड को एक साथ लाता है।
यह पार्क सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और रोबोटिक्स तक फैले एक विनिर्माण इकोसिस्टम के निर्माण पर केंद्रित होगा।
इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोधवाडिया उपस्थित थे। इस ओएमयू पर भारत में ताइवान चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष और एलिजेंस ग्रुप के अध्यक्ष साइमन ली और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी. भारती ने हस्ताक्षर किए।
अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण के लिए एक समर्पित केंद्र बनाकर, भारतीय और ताइवानी कंपनियों के बीच औद्योगिक संबंधों को मजबूत करना है।
इस पार्क के सानंद-धोलेरा गलियारे में विकसित होने की उम्मीद है, जो राज्य में एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उभरा है।
इस पहल से 1,000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित होने का अनुमान है, जिसमें मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों की ताइवानी कंपनियों की भागीदारी की उम्मीद है।
अधिकारियों का यह भी अनुमान है कि यह परियोजना अगले पांच वर्षों में लगभग 12,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा कि यह प्रस्तावित विकास 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के उद्देश्यों और गुजरात की उस व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जिसके तहत राज्य खुद को उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों के केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है।
उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर और संबंधित 1.24 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं पहले से ही कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
इस इंडस्ट्रियल पार्क से सेमीकंडक्टर विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रोबोटिक्स और संबद्ध आपूर्ति श्रृंखलाओं को कवर करने वाले एक एकीकृत इकोसिस्टम के निर्माण में सहायता मिलने की उम्मीद है, जिससे उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत और ताइवान के बीच औद्योगिक सहयोग और मजबूत होगा।
--आईएएनएस
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