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'स्वामित्व' योजना के तहत गुजरात के 14,866 गांवों की मैपिंग पूरी, ग्रामीणों को मालिकाना हक देने की तैयारी

 

गांधीनगर, 2 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की 'स्वामित्व' योजना के तहत सर्वे ऑफ इंडिया' ने गुजरात के 14,866 गांवों में ग्रामीण रिहायशी इलाकों की मैपिंग पूरी कर ली। इससे ग्रामीण परिवारों को कानूनी मालिकाना हक के दस्तावेज जारी करने के लिए जियोस्पेशियल (भौगोलिक-स्थानिक) आधार तैयार हो गया है।

यह मैपिंग कार्य, गुजरात, दमन और दीव में भूमि प्रशासन, बुनियादी ढांचे की योजना और शहरी विकास में सहयोग देने के विभाग के व्यापक काम का हिस्सा है।

गांधीनगर स्थित 'सर्वे ऑफ इंडिया' का 'गुजरात, दमन और दीव जियोस्पेशियल निदेशालय', 'अमृत 2.0' (एएमआरयूटी 2.0) योजना के तहत 55 शहरों और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए भी मैपिंग परियोजनाएं चला रहा है।

विभाग के कार्यों का विवरण देते हुए, गुजरात, दमन और दीव भू-स्थानिक निदेशालय के निदेशक सिद्धांत सेन ने बताया कि 1767 में स्थापित भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने ढाई शताब्दियों से अधिक समय तक देश के भौगोलिक मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा, "इस संस्थान की शुरुआत 'ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे' से हुई थी। इसमें सर्वेक्षकों ने घने जंगलों, रेगिस्तानों और कठिन पहाड़ी इलाकों से गुजरते हुए जमीन के बड़े हिस्सों को मापने के लिए थियोडोलाइट जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया था।"

यह काम अपने समय के सबसे महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में से एक था। इसने बाद में किए गए कई मैपिंग कार्यों की नींव रखी, जिसमें माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई की वैज्ञानिक माप भी शामिल है। उन्होंने बताया, "भारत के संविधान की मूल प्रति की छपाई में भी 'सर्वे ऑफ इंडिया' ने योगदान दिया था।"

गांधीनगर स्थित यह निदेशालय गुजरात, दमन और दीव की मैपिंग के लिए जिम्मेदार है। इसमें कच्छ के रण और सौराष्ट्र के तट से लेकर खंभात की खाड़ी और दमन-दीव के तटीय इलाकों तक का भौगोलिक क्षेत्र शामिल है। सेन ने कहा कि नियोजित विकास के लिए सटीक भौगोलिक जानकारी बहुत जरूरी है, खासकर तब जब देश 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।

सेन ने कहा कि सुनियोजित विकास के लिए सटीक भौगोलिक जानकारी आवश्यक है, विशेष रूप से तब जब देश 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

विभाग ने पूरे गुजरात में हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल कंट्रोल पॉइंट स्थापित किए हैं, जो मैपिंग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भौगोलिक संदर्भ बिंदुओं (रेफरेंस पॉइंट) का काम करते हैं।

इनका इस्तेमाल इंजीनियरों और सरकारी एजेंसियों द्वारा बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने, बांध की सुरक्षा का आकलन करने, और सड़कों, पुलों व नहरों की योजना बनाने जैसे कार्यों के लिए किया जाता है।

1890 का 'ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे' बेंचमार्क, विभाग की ऐतिहासिक भू-गणितीय संपत्तियों में से एक है। वडीनार, पोरबंदर, ओखा और कांडला में स्थित टाइड-गेज वेधशालाएं समुद्र के स्तर में होने वाले बदलावों की निगरानी करती हैं और उनका रिकॉर्ड रखती हैं।

सरकारी विभागों, संस्थानों, इंजीनियरों और सर्वेक्षकों के उपयोग के लिए भूमापीय संपत्ति रजिस्टरों के माध्यम से नियंत्रण बिंदुओं का विवरण उपलब्ध कराया गया है।

निदेशालय ने गुजरात की अंतरराष्ट्रीय सीमा की भी मैपिंग की है और यह भारत तथा गुजरात के राजनीतिक मानचित्रों को अंग्रेजी, हिंदी और गुजराती भाषाओं में प्रकाशित करता है। आधुनिक सर्वेक्षण की जरूरतों को पूरा करने के लिए, गुजरात और दमन-दीव में 102 'कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन' (सीओआरएस) स्थापित किए गए हैं।

ये सर्वेक्षकों, इंजीनियरों, किसानों और ड्रोन ऑपरेटरों को सेंटीमीटर-स्तर की सटीकता के साथ रियल-टाइम पोजिशनिंग सेवाएं प्रदान करते हैं।

निदेशालय के अनुसार, इस सुविधा का उपयोग करने के लिए 1,042 उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया है। 'स्वामित्व' योजना के तहत ग्रामीण मैपिंग के अलावा, विभाग शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे के विकास में भी योगदान दे रहा है। 'अमृत 2.0' के तहत, जीआईएस-आधारित विकास योजनाओं और मास्टर प्लान को तैयार करने में मदद के लिए 55 शहरों की मैपिंग का काम शुरू किया गया है।

इन नक्शों से जलापूर्ति, सीवेज सिस्टम, शहरी बुनियादी ढांचे और हरित क्षेत्रों की योजना बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। निदेशालय, नगर नियोजन और मूल्यांकन विभाग के लिए मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की मैपिंग का काम भी कर रहा है।

महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े एक अन्य प्रोजेक्ट में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के लिए काकरापार में 121 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का एलआईडीएआर-आधारित सर्वे पूरा कर लिया गया है।

अगले चरण में 183 वर्ग किलोमीटर के अतिरिक्त क्षेत्र का सर्वे करने की तैयारी चल रही है। इस बीच, केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग और गुजरात सरकार द्वारा संयुक्त रूप से लागू किए गए 'नक्शा' प्रोजेक्ट के तहत पांच शहरों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। इस पहल का उद्देश्य शहरी भूमि और संपत्ति के रिकॉर्ड को आधुनिक बनाना, तथा स्वामित्व दस्तावेजों की सटीकता और पारदर्शिता में सुधार करना है।

निदेशालय अपनी मैपिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ड्रोन, एलआईडीएआर, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहा है।

1767 में अपनी शुरुआत से लेकर आज के डिजिटल कामकाज तक, 'सर्वे ऑफ इंडिया' की मुख्य जिम्मेदारी देश की भूमि की वैज्ञानिक माप और मैपिंग करना रही है। इसके काम से अब कई तरह की गतिविधियों को मदद मिलती है- जैसे ग्रामीण संपत्ति के अधिकार तय करना, शहरी विकास योजनाएं तैयार करना, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े काम।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी