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50 करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, दुबई हैंडलर्स को बैंक खाते देने वाला गुजरात से गिरफ्तार

 

अहमदाबाद, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। अहमदाबाद सिटी साइबर क्राइम ब्रांच ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर दुबई में बैठे हैंडलर्स को बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। जांचकर्ताओं को इस मामले में 30 से ज्यादा बैंक खाते मिले हैं, जो 15 राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की 80 से अधिक शिकायतों से जुड़े हैं। इन खातों के जरिए 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन हुआ है।

यह गिरफ्तारियां एक मामले की जांच के बाद की गई हैं, जिसमें शिकायतकर्ता के साथ दो फर्जी इन्वेस्टमेंट एप्लिकेशन के जरिए 67.92 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई थी। इन एप्लिकेशन में स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग से भारी रिटर्न देने का वादा किया गया था।

आरोपियों की पहचान इरफान शेख (41), सोहेब जोजावरवाला (37), शहजाद अजमेरवाला (35) और इश्तियाक रियावाला (38) के रूप में हुई है। इरफान और सोहेब वडोदरा के रहने वाले हैं, जबकि शहजाद और इश्तियाक अहमदाबाद के जमालपुर इलाके से हैं।

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, शिकायतकर्ता से अलग-अलग व्हाट्सएप नंबरों के जरिए संपर्क किया गया और उसे 'जेबी एक्स वन' नाम के एक एप्लिकेशन में निवेश करने के लिए राजी किया गया। दावा किया गया कि यह एप्लिकेशन 'जूलियस बेयर' द्वारा चलाया जा रहा है।

फोन करने वालों ने दावा किया कि इस एप्लिकेशन के जरिए निवेश करने पर कोई ब्रोकरेज चार्ज नहीं लगेगा। उन्होंने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नाम, लोगों, हस्ताक्षर और मुहर वाला एक फर्जी सर्टिफिकेट भी भेजा ताकि यह भरोसा दिलाया जा सके कि कंपनी मार्केट रेगुलेटर के पास रजिस्टर्ड है।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने उस एप्लिकेशन के जरिए 47.14 लाख रुपए का निवेश किया। इस धोखाधड़ी के दूसरे हिस्से में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की 'अंजू गर्ग' बनकर एक व्यक्ति ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया। उसने 'ब्लॉक ट्रेडिंग' में निवेश करने का मौका दिया और एक ही दिन में 5 से 20 प्रतिशत रिटर्न देने का वादा किया।

शिकायतकर्ता को एक और एप्लिकेशन, 'आईडी-क्यूएसबी' डाउनलोड करने और उसमें 20.78 लाख रुपए निवेश करने के लिए राजी किया गया। इसके बाद उस प्लेटफॉर्म पर शेयर ट्रांजैक्शन के जरिए 74,32,707.79 रुपए का बैलेंस दिखने लगा।

हालांकि जब शिकायतकर्ता ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो 'अंजू गर्ग' बनकर बात करने वाले व्यक्ति ने 20 प्रतिशत 'शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स' और 4 प्रतिशत 'हेल्थ एंड एजुकेशन सेस' की मांग की।

अधिकारियों ने बताया, "दोनों एप्लिकेशन चलाने वालों ने निवेश को असली दिखाने के लिए फर्जी इलेक्ट्रॉनिक जानकारी दिखाई थी। उन्होंने एक सोची-समझी साजिश के तहत मिलकर काम किया, ताकि शिकायतकर्ता से 67.92 लाख रुपए ठगे जा सकें।"

जांचकर्ताओं ने तकनीकी इनपुट और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करके अहमदाबाद और वडोदरा में उन लोगों का पता लगाया, जिन्होंने धोखाधड़ी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। पुलिस के अनुसार, इरफान ने कमीशन के बदले अपना बैंक अकाउंट सोहेब को दिया था।

आरोप है कि सोहेब ने अपना अकाउंट, इरफान का अकाउंट और अन्य लोगों के अकाउंट इकट्ठा किए और कमीशन लेकर शहजाद को पांच से ज्यादा बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए।

शहजाद ने सोहेब से ये अकाउंट लिए, उनके लिए कमीशन का भुगतान किया और फिर उन्हें इश्तियाक को सौंप दिया। वह बैंक अकाउंट धारकों की पहचान करने और इश्तियाक के लिए अकाउंट का इंतजाम करने में भी शामिल था।

आरोप है कि इस नेटवर्क में इश्तियाक की मुख्य भूमिका थी। उसने शहजाद से बैंक अकाउंट लिए और कमीशन के बदले उन्हें दुबई में अपने साथियों को भेज दिया। साइबर क्राइम ब्रांच ने इश्तियाक के पास से 30 से ज्यादा बैंक अकाउंट किट बरामद कीं।

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर जांच करने से पता चला कि ये अकाउंट 15 से ज्यादा राज्यों में दर्ज 80 से अधिक शिकायतों से जुड़े थे, जिनमें 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन हुआ था।

पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क के दायरे का पता लगाने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है।

--आईएएनएस

डीके/वीसी