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गुजरात: रथ यात्रा के दौरान अहमदाबाद पुलिस ने लापता हुए 64 बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया

 

अहमदाबाद, 17 जुलाई (आईएएनएस)। अहमदाबाद नगर पुलिस ने 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान लापता हुए 64 बच्चों को उनके माता-पिता और अभिभावकों से मिला दिया। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि जुलूस मार्ग पर श्रद्धालुओं की सहायता और आपात स्थिति से निपटने के लिए 17 जन सहायता केंद्र स्थापित किए गए थे।

अधिकारियों के अनुसार, वार्षिक जुलूस में शामिल होने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहायता के लिए रथ यात्रा मार्ग के प्रमुख स्थानों पर अस्थायी जन सहायता केंद्र स्थापित किए गए थे।

पुलिस कर्मियों ने प्रत्येक केंद्र पर लाउडस्पीकर के माध्यम से जागरूकता फैलाने और जनता का मार्गदर्शन करने के लिए घोषणाएं भी कीं।

जमालपुर में जगन्नाथ मंदिर के पास, खमासा चौराहा, रायपुर पुलिस चौकी, पंचकुवा गेट, कालूपुर सर्कल ट्रैफिक चौकी, सरसपुर विसामो, प्रेम दरवाजा पुलिस चौकी, तंबू पुलिस चौकी, दिल्ली चकला, शाहपुर गेट, रंगीला पुलिस चौकी, और आरसी के सामने केंद्र स्थापित किए गए थे।

अधिकारियों ने बताया कि दिन भर चलने वाले जुलूस के दौरान अपने परिवारों से बिछड़ गए बच्चों का पता लगाने में सहायता केंद्रों ने अहम भूमिका निभाई।

गायकवाड़ हवेली पुलिस थाना क्षेत्र से कुल 41 बच्चे, शहरकोटदा पुलिस थाना क्षेत्र से 21 बच्चे और कालूपुर एवं शाहपुर पुलिस थाना क्षेत्रों से एक-एक बच्चे की पहचान की गई, उनके माता-पिता या अभिभावकों का पता लगाया गया और बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके परिवारों को सौंप दिया गया।

पुलिस ने बताया कि सहायता केंद्रों पर तैनात अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद सभी 64 बच्चों को उनके परिवारों से मिला दिया गया।

149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा गुरुवार को अहमदाबाद के जमालपुर क्षेत्र में स्थित लगभग 400 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर से निकाली गई।

पुरी के बाहर भारत की सबसे बड़ी रथ यात्राओं में से एक मानी जाने वाली यह वार्षिक यात्रा, अपने पारंपरिक मार्ग को तय करने के बाद मंदिर लौटने से पहले पुराने शहर से गुजरी।

भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ जब शहर से गुजरे तो लाखों श्रद्धालु प्रार्थना करने के लिए मार्ग पर कतार में खड़े हो गए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुलूस शुरू होने से पहले 'मंगला आरती' में भाग लिया, जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक 'पाहिंद विधि' का पालन करते हुए प्रतीकात्मक रूप से रथों के आगे के रास्ते की सफाई की।

--आईएएनएस

एमएस/