कोयला क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार उठा रही ठोस कदम: जी. किशन रेड्डी
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार को संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वाणिज्यिक कोयला खनन (कमर्शियल कोल माइनिंग) में सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोयला मंत्रालय निजी कंपनियों और उद्योग संगठनों के साथ लगातार संवाद कर रहा है। इसके लिए देश भर में रोडशो और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि वाणिज्यिक कोयला खनन के बारे में अधिक जागरूकता पैदा हो और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ सके।
जी. किशन रेड्डी ने समिति को बताया कि अब तक वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 14 दौर सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं, जबकि 15वें दौर की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी नीलामी प्रणाली ने भारत के कोयला क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है और इससे प्रतिस्पर्धा तथा निवेश को बढ़ावा मिला है।
बैठक में कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों (कोल पीएसयू) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों ने पिछले दो वित्त वर्षों में भारत को एक अरब टन (1 बिलियन टन) कोयला उत्पादन का आंकड़ा हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में देश के कुल कोयला उत्पादन में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत रहा। उन्होंने यह भी कहा कि कोयला क्षेत्र में लगातार किए गए सुधारों से खदानों को परिचालन में लाने की अवधि में उल्लेखनीय कमी आई है।
दत्त के अनुसार, पूरी तरह से खोजी जा चुकी कोयला खदानों के संचालन शुरू होने की समयसीमा 51 महीने से घटकर 40 महीने रह गई है। वहीं, आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए यह अवधि 66 महीने से घटकर 52 महीने हो गई है।
बैठक में कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रुपिंदर बराड़ ने 'वाणिज्यिक कोयला खनन सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा' विषय पर एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी।
संसदीय समिति के सदस्यों ने कोयला क्षेत्र में सुधारों के लिए मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ाने तथा वाणिज्यिक खनन के विस्तार के साथ पर्यावरणीय और स्थानीय समुदायों से जुड़े मुद्दों के बीच संतुलन बनाए रखने के संबंध में कई सुझाव भी दिए।
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समिति के सदस्यों को आश्वस्त किया कि उनके सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और उन्हें भविष्य की नीतियों एवं निर्णयों में उचित महत्व दिया जाएगा।
--आईएएनएस
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