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जम्मू-कश्मीर: 'सेहत स्कीम' को फिर से शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने 175 करोड़ का पैकेज दिया

 

श्रीनगर, 19 जून (आईएएनएस)। 'आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत' योजना से जम्मू-कश्मीर के प्राइवेट अस्पतालों के हटने के बाद शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस योजना को फिर से शुरू करने के लिए 175 करोड़ रुपए का पैकेज दिया। साथ ही अलग-अलग अस्पतालों के बकाया बिलों का जल्द भुगतान करने का भरोसा दिलाया गया।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश है, जहां आय की सीमा की परवाह किए बिना हर परिवार इस योजना का लाभ उठा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत-पीएम-जेएवाई सेहत स्कीम के लाभार्थियों के लिए प्राइवेट अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों ने स्कीम से बाहर निकलने के अपने प्रस्तावित फैसले को अस्थायी रूप से वापस ले लिया है।

अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला सरकार की ओर से लंबे समय से लंबित रीइम्बर्समेंट क्लेम (खर्च की भरपाई के दावे) के निपटारे के लिए 175 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी देने के बाद लिया गया।

अधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पैनल में शामिल प्राइवेट हेल्थकेयर संस्थानों के बकाया भुगतान को चुकाने के लिए 175 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

उम्मीद की जा रही है कि यह फंड स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) के माध्यम से जारी किया जाएगा, जिसके बाद रीइम्बर्समेंट की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों ने कहा कि फंड के ट्रांसफर और वितरण में कुछ दिन लग सकते हैं।

यह कदम 'सेहत' स्कीम के भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच उठाया गया है। इससे पहले, जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन ने क्लेम के निपटारे में देरी के कारण भारी वित्तीय संकट का हवाला देते हुए एक जुलाई से इस प्रोग्राम से हटने की योजना की घोषणा की थी।

स्टेट हेल्थ एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान, प्राइवेट हेल्थकेयर संस्थानों के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया गया कि मंजूर की गई राशि बिना किसी देरी के जारी कर दी जाएगी।

इस आश्वासन के बाद, एसोसिएशन अपने प्रस्तावित डी-एम्पैनलमेंट (पैनल से हटने) को टालने और फिलहाल स्कीम के तहत हेल्थकेयर सेवाएं जारी रखने पर सहमत हो गई।

अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि अच्छी गुणवत्ता वाली हेल्थकेयर सेवाएं जारी रखने के लिए बकाया राशि का तुरंत भुगतान जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेश में अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए लंबित भुगतान, खासकर पिछले तीन महीनों के बकाया, जल्द से जल्द जारी किए जाने चाहिए।

एसोसिएशन के अनुसार, बकाया राशि 250 करोड़ रुपये से अधिक हो गई थी, जिसके कारण स्कीम से हटने की चेतावनी दी गई थी।

सरकार का फंड जारी करने का फैसला 'सेहत' पहल के तहत हेल्थकेयर सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह पहल जम्मू-कश्मीर के लाखों निवासियों को कैशलेस मेडिकल इलाज की सुविधा देती है। हेल्थकेयर से जुड़े लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इस आर्थिक मदद से पैनल में शामिल अस्पतालों का भरोसा बढ़ेगा, मरीजों की देखभाल बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी और रीइम्बर्समेंट से जुड़ी चिंताओं का लंबे समय के लिए समाधान निकलेगा।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम