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सरकार एटीएफ की कीमतों को लेकर एयरलाइंस और तेल कंपनियों से कर रही बातचीत: राम मोहन नायडू

 

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एयरलाइन और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की लागत को लेकर बातचीत कर रही है, जिसमें पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेजी से वृद्धि हुई है।

केंद्रीय मंत्री का यह बयान इंडिगो के उस कदम के बाद आया है, जिसमें एटीएफ की बढ़ी हुई कीमतों के कारण एयरलाइन ने फ्यूल सरचार्ज में इजाफा करने का ऐलान किया है।

केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में आईएफक्यूएम सिम्पोजियम 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से कहा, "सबसे अहम मुद्दों में से एक पश्चिम एशिया का संकट है और यह कैसे एटीएफ की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है, लेकिन हम अभी भी एयरलाइंस और ओएमसी, दोनों के साथ बातचीत कर रहे हैं। देखते हैं कि बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।"

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस मामले पर कोई भी फैसला लेने से पहले नागर विमानन मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा।

उन्होंने कहा, "मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है और जब हम सभी संबंधित पक्षों का नजरिया समझ लेंगे, तब हम कोई फैसला लेंगे।"

कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, नायडू ने एविएशन सेक्टर के लिए सरकार के लंबे समय के विजन के बारे में बताया। इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) को बढ़ावा देना, कई एयरपोर्ट हब बनाना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि भारत ने नियम बनाया है कि इंटरनेशनल उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का 1 प्रतिशत हिस्सा 2027 तक एसएएफ से आना चाहिए, जो 2028 तक 2 प्रतिशत और 2030 तक 5 प्रतिशत हो जाएगा।

इसके अलावा, सरकार सरकारी रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) के साथ ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक एसएएफ बनाने पर बातचीत कर रही है।

उनके मुताबिक, भारत का लक्ष्य देश भर में कई एयरपोर्ट हब बनाकर ग्लोबल एविएशन हब बनना है। साथ ही, 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे के जरिए लंबी दूरी की इंटरनेशनल उड़ानों से जुड़ सकेंगे।

एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग पर मंत्री ने इवेंट में कहा कि भारत इंजन बनाने को एक अहम क्षमता मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम कर रहा है, जिसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) गतिविधियों और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी।

उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन बनाने में हुई प्रगति का जिक्र किया और कहा कि डिफेंस सेक्टर में हासिल की गई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है।

--आईएएनएस

एबीएस