गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी, तीन साल में फोलियो 2.6 गुना बढ़े; बड़े फंडों को पीछे छोड़ा: रिपोर्ट
मुंबई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। सोने की कीमतों में लगातार आई तेजी के बीच निवेशकों का रुझान गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की ओर तेजी से बढ़ा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड ईटीएफ में निवेश और फोलियो की संख्या में पिछले तीन वर्षों के दौरान इतनी तेज वृद्धि हुई है कि इसने लार्ज-कैप इक्विटी फंडों को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि विशेषज्ञों ने इसे लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि यह रुझान संतुलित एसेट एलोकेशन रणनीति से विचलन का संकेत हो सकता है।
ओम्नीसाइंस कैपिटल द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड ईटीएफ की प्रबंधित संपत्तियों (एयूएम) में वृद्धि इक्विटी फंडों की तुलना में कहीं अधिक रही है। अंतर्निहित परिसंपत्तियों के रिटर्न को समायोजित करने के बाद भी यह स्पष्ट हुआ है कि निवेशक मुख्य रूप से सोने की कीमतों में हुई तेजी के कारण इस वर्ग में अधिक पैसा लगा रहे हैं।
ओम्नीसाइंस कैपिटल के अध्यक्ष एवं मुख्य पोर्टफोलियो प्रबंधक अश्विनी शामी ने कहा कि यह व्यवहार "फियर ऑफ मिसिंग आउट" (एफओएमओ) यानी तेजी से बढ़ती कीमतों वाले निवेश में पीछे छूट जाने के डर को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य परिसंपत्ति की कीमतें इसी तरह बढ़तीं तो निवेशकों की प्रतिक्रिया भी लगभग ऐसी ही होती। उन्होंने कहा कि गोल्ड ईटीएफ की ओर यह आक्रामक झुकाव एक अनुशासित एसेट एलोकेशन दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विचलन को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2023 से अब तक गोल्ड ईटीएफ फोलियो की संख्या 2.6 गुना बढ़ चुकी है। इसके मुकाबले लार्ज-कैप इक्विटी फंडों के फोलियो में केवल 1.3 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। यह अंतर दर्शाता है कि निवेशकों की रुचि हाल के वर्षों में तेजी से सोने की ओर बढ़ी है।
विश्लेषण में कहा गया है कि निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी अब ऐसे स्तर पर पहुंच रही है, जो आमतौर पर अनुशंसित निवेश ढांचे से अधिक प्रतीत होती है। सामान्यतः सोने को वैकल्पिक परिसंपत्ति (अल्टरनेटिव एसेट) माना जाता है और विशेषज्ञ निवेश पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी 5 से 10 प्रतिशत रखने की सलाह देते हैं। वहीं सभी वैकल्पिक परिसंपत्तियों का संयुक्त हिस्सा प्रायः 10 से 20 प्रतिशत के बीच रखा जाता है।
वैकल्पिक निवेश श्रेणी में प्राइवेट इक्विटी, स्ट्रक्चर्ड डेट, स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) जैसे साधन भी शामिल होते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गोल्ड ईटीएफ का कुल एयूएम बढ़कर लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो लार्ज-कैप इक्विटी फंडों द्वारा प्रबंधित लगभग 4 लाख करोड़ रुपए की संपत्तियों के करीब आधे के बराबर है।
ओम्नीसाइंस कैपिटल का मानना है कि लार्ज-कैप फंडों की तुलना में लगभग 47 प्रतिशत के बराबर पहुंच चुकी सोने की हिस्सेदारी अत्यधिक ऊंची मानी जा सकती है और इस पर सावधानीपूर्वक विचार किए जाने की जरूरत है।
अश्विनी शामी ने निवेशकों से अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने और सोने से भविष्य में मिलने वाले संभावित रिटर्न को लेकर अत्यधिक आशावादी नहीं होने की सलाह दी है। हालांकि उन्होंने दीर्घकालिक आधार पर सोने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा, लेकिन इस धारणा पर सवाल उठाया कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमतें, मुद्रास्फीति और ब्याज दरें एक साथ लगातार बढ़ती रहेंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी अकेले सोने की कीमतों को लगातार ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। यदि अन्य निवेशक बेहतर प्रतिफल देने वाले फिक्स्ड-इनकम साधनों की ओर रुख करते हैं, तो सोने की मांग पर असर पड़ सकता है।
विश्लेषण के अनुसार, अल्प और मध्यम अवधि वाले ऋण साधनों में निवेश बढ़ने से केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का प्रभाव संतुलित हो सकता है और वैश्विक सोने की कीमतों में अत्यधिक तेजी पर अंकुश लग सकता है।
--आईएएनएस
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