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कन्या केलवानी निधि से लेकर नमामि गंगा अभियान तक: पीएम मोदी के उपहारों की नीलामी बनी जनसेवा का माध्यम

 

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होकर उनके 25 वर्षों के जनसेवा और राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान के उपलक्ष्य में एक महीने तक चलने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' का पालन कर रही है।

इस दौरान एक पहलू जो व्यापक रूप से ध्यान से नहीं देखा गया है, वह यह है कि उन्हें प्राप्त उपहार, स्मृति चिन्ह और यादगार वस्तुएं किस प्रकार 'जनहित' के कार्यों में योगदान दे रही हैं।

यह सिलसिला पिछले 25 वर्षों से निरंतर बना हुआ है-पहले अक्टूबर 2001 से गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और मई 2014 से प्रधानमंत्री के रूप में। उन्हें प्राप्त उपहारों को वर्षों से नकद में परिवर्तित किया गया है और उससे प्राप्त धनराशि का उपयोग बालिका सशक्तीकरण, गंगा नदी की सफाई और अन्य उल्लेखनीय कार्यक्रमों के वित्तपोषण में किया गया है।

कन्या केलवानी निधि योजना और नमामि गंगा योजना, विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी की जनसेवा की पहचान बन गई हैं क्योंकि उन्होंने उपहारों-शॉल, मूर्तियां आदि को "सेवा के साधन" में बदल दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने 2003 में कन्या केलवानी निधि की नींव रखी, जिसके तहत बालिका शिक्षा और महिला साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित कोष बनाया गया।

2003 में बालिका शिक्षा के लिए वित्त पोषण हेतु शुरू किया गया यह कार्यक्रम सच्ची सेवा का प्रतीक था, जो बाद के वर्षों में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और अन्य कौशल विकास एवं महिला सशक्तीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से और भी मजबूत हुआ।

कन्या केलावनी निधि ने तत्कालीन मुख्यमंत्री को प्राप्त उपहारों की नीलामी से धनराशि जुटाई और वर्षों बाद यह मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना (एमवाईएसवाई) नामक एक औपचारिक योजना बन गई। 2017-18 में औपचारिक रूप से शुरू की गई यह योजना नीट के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश पाने वाली लड़कियों को सहायता प्रदान करती है। पात्र महिला मेडिकल छात्राओं को एमवाईएसवाई के माध्यम से ट्यूशन फीस का 50 प्रतिशत मिलता है।

नमामि गंगा कार्यक्रम-2014 में शुरू किया गया, गंगा को उसके गौरवशाली अतीत और प्रदूषण मुक्त स्वरूप में पुनर्स्थापित करने का राष्ट्र का सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास है।

नमामि गंगा पवित्र नदी और उसकी सहायक नदियों को पुनर्जीवित और नया जीवन देने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना रही है। यह परियोजना चाहे किसी भी कारण से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने से दूर हो, प्रधानमंत्री द्वारा प्राप्त उपहारों की नीलामी ने इस कार्य में निरंतर योगदान दिया है।

जनवरी 2019 में शुरू हुई प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी से प्राप्त धनराशि सीधे नमामि गंगा कार्यक्रम के लिए समर्पित है।

सरकारी अनुमानों के अनुसार, नीलामी के पिछले संस्करणों के माध्यम से नमामि गंगा परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई गई है। इस वर्ष भी, आठवें संस्करण में लगभग 1,500 चुनिंदा उपहार शामिल हैं, जो 31 अक्टूबर तक नीलाम होंगे और एकत्रित धनराशि नदी सफाई परियोजना के लिए उपयोग की जाएगी।

रोचक बात यह है कि नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में रखे गए उपहारों की एक विस्तृत श्रृंखला की कीमत मात्र 200 रुपये रखी गई है, जिससे आम भारतीय सोने के टुकड़े के बजाय इतिहास के एक अंश के मालिक बन सकें।

परोपकार और प्रतीकात्मकता के अलावा, यह प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पिछले 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में अपनाई गई जनसेवा की भावना को भी दर्शाता है। अखिल भारतीय और एक महीने तक चलने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' के माध्यम से पार्टी के नेता और कार्यकर्ता न केवल मोदी सरकार की उपलब्धियों बल्कि इस तरह की निस्वार्थ सेवा के बारे में भी लोगों को शिक्षित और सूचित करना चाहते हैं।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पीएम मोमेंटोस ई-ऑक्शन 2026 के शुभारंभ के दौरान सटीक रूप से कहा कि पीएम मोदी का मानना ​​है, "जो कुछ प्राप्त होता है वह मेरा नहीं है; जो कुछ मुझे दिया जाता है वह मेरा नहीं है और जो मेरा नहीं है उसे जमा करने का मुझे कोई अधिकार नहीं है।"

उन्होंने प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत उपहारों की नीलामी को सार्वजनिक भागीदारी के एक माध्यम और एक राष्ट्रीय मुद्दे में बदलने का श्रेय भी दिया।

--आईएएनएस

एएसएच/पीएम