गुजरात से दिल्ली तक: पीएम मोदी ने राज्य की पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर कैसे पहुंचाया
गांधीनगर, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा काल के 25 साल पूरे हो गए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के सबसे लंबे समय तक चुने हुए सरकार प्रमुख रहने तक के उनके राजनीतिक सफर में कई ऐसी पहलें शामिल हैं, जिनकी शुरुआत राज्य-स्तर के प्रयोगों के तौर पर हुई थी और बाद में, उनके नई दिल्ली आने के बाद उन्हें अपनाया गया, उनका विस्तार किया गया या उन्हें राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप दिया गया।
पीएम मोदी ने 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट ने उनके लगातार 25 साल के नेतृत्व का जिक्र किया और खास तौर पर गुजरात में उनके अनुभव और कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों के बीच संबंध को रेखांकित किया।
कैबिनेट के प्रस्ताव में 'स्वागत' और 'ज्योतिग्राम' जैसी गुजरात की पहलों का उदाहरण दिया गया, जिनके मूल तरीकों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया।
इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण 'स्वागत' है, जो अप्रैल 2003 में गुजरात में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी द्वारा शुरू किया गया टेक्नोलॉजी पर आधारित शिकायत निवारण सिस्टम था।
इसने नागरिकों को सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें रखने की सुविधा दी। बाद में पीएम मोदी ने इसे 'प्रगति' के लिए प्रेरणा बताया। 'प्रगति' प्रधानमंत्री का एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करता है और अलग-अलग सरकारों से जुड़े काम में आने वाली रुकावटों को दूर करता है।
'स्वागत' को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड मिला। डिजिटल गवर्नेंस में भी गुजरात से भारत तक का यही सफर देखा जा सकता है। गुजरात के 'ई-ग्राम विश्वग्राम' प्रोजेक्ट ने ब्रॉडबैंड के जरिए ग्राम पंचायतों को जोड़ा और सरकारी सेवाओं तक पहुँच आसान बनाई।
पीएम मोदी ने बाद में कहा कि 'ई-ग्राम' के साथ-साथ अन्य डिजिटल-गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में गुजरात के अनुभव ने 'डिजिटल इंडिया' के तहत गवर्नेंस में टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर अपनाने का आधार तैयार करने में मदद की।
हेल्थकेयर के क्षेत्र में, गुजरात की 'मुख्यमंत्री अमृतम' (एमए) योजना, जिसे 2012 में गरीब परिवारों को इलाज के भारी खर्च से बचाने के लिए शुरू किया गया था, 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई बहुत बड़ी 'आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' के अनुभव का हिस्सा बनी।
बाद में गुजरात ने एमए को 'आयुष्मान भारत' के साथ मिलाकर पीएमजेएवाई-एमए बना दिया। यही पैटर्न पानी और बिजली के मामलों में भी दिखता है।
गुजरात की 'ज्योतिग्राम योजना' ने अलग-अलग एग्रीकल्चर फीडर के जरिए गांवों को 24 घंटे बिजली दी, जबकि इसकी कम्युनिटी-बेस्ड पानी की पहलों और 'पानी समितियों' ने लोगों की भागीदारी वाले जल प्रबंधन का एक मॉडल पेश किया।
पीएम मोदी ने खुद गुजरात में पानी से जुड़े अपने अनुभव को राष्ट्रीय 'जल जीवन मिशन' से जोड़ा है, जिसके तहत पूरे भारत में ग्रामीण घरों तक पाइप से पीने का पानी पहुंचाया गया है। इसी तरह गुजरात का 'निर्मल गुजरात' अभियान, जो राज्य में सफाई के लिए शुरू किया गया था, देशव्यापी 'स्वच्छ भारत मिशन' से पहले ही शुरू हो चुका था। बाद में, राष्ट्रीय सफाई अभियान के बारे में बताते हुए पीएम मोदी ने गुजरात के उस कार्यक्रम का जिक्र भी किया था।
शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में भी ऐसी ही समानताएं दिखती हैं, जहां नीतियों पर एक जैसा जोर दिया गया।
गुजरात के 'कन्या केलवणी' और 'शाला प्रवेशोत्सव' अभियानों का मकसद लड़कियों का स्कूल में दाखिला और उनकी शिक्षा था। बाद में, केंद्र में पीएम मोदी की सरकार ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रम शुरू किए।
गुजरात के 'कौशल्य वर्धन केंद्र' भी राज्य में वोकेशनल स्किलिंग (व्यावसायिक कौशल विकास) को बढ़ावा देने का हिस्सा थे। ये केंद्र 'कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय' के तहत एक समर्पित राष्ट्रीय संस्थागत ढांचा बनने से पहले ही शुरू हो चुके थे।
खेलों के मामले में तो यह बात और भी साफ है। पीएम मोदी ने 2010 में गुजरात में 'खेल महाकुंभ' शुरू किया था, जिसमें 16 खेलों में 13 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था।
केंद्र में, खेल प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए 'खेलो इंडिया' एक राष्ट्रीय मंच बना। बाद में पीएम मोदी ने 'खेल महाकुंभ' को वह 'बीज' बताया जो आगे चलकर एक बहुत बड़े आंदोलन में बदल गया।
इस तरह, गवर्नेंस, हेल्थ, डिजिटल एक्सेस, पानी, बिजली, साफ-सफाई, लड़कियों की शिक्षा, स्किल्स और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में, पीएम मोदी के 25 साल के सफर की मुख्य बात यह रही है कि गुजरात स्तर के कई प्रयोग और तरीके राज्य की प्रयोगशाला से निकलकर राष्ट्रीय कार्यक्रमों का हिस्सा बने - कभी सीधे प्रेरणा के तौर पर, तो कभी उसी पॉलिसी के मकसद को बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनाकर।
--आईएएनएस
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