केरल ने 'माई पुलिस स्टेशन' पुलिसिंग सुधार की घोषणा की, एसएचओ की तैनाती होगी
तिरुवनंतपुरम, 6 अगस्त (आईएएनएस)। हाल के वर्षों में केरल के पुलिसिंग ढांचे में किए गए सबसे बड़े सुधारों में से एक के तहत राज्य सरकार ने गुरुवार को पुलिस स्टेशनों के कामकाज में पूरी तरह बदलाव की घोषणा की। इसके तहत ज्यादातर पुलिस स्टेशनों में सर्कल इंस्पेक्टर की जगह सब-इंस्पेक्टर को स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) बनाया जाएगा। साथ ही, स्वतंत्रता दिवस से 'माई पुलिस स्टेशन' नामक नागरिकों पर केंद्रित पुलिसिंग प्रोग्राम शुरू किया जाएगा।
इन सुधारों की घोषणा करते हुए केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस पहल को एक ऐतिहासिक बदलाव बताया। इसका मकसद पुलिस स्टेशनों को ज्यादा सुलभ, जवाबदेह और जनहितैषी बनाना है। साथ ही लोकतांत्रिक पुलिसिंग के एक नए दौर की शुरुआत करना है।
नई व्यवस्था के तहत केरल के 484 लॉ एंड ऑर्डर पुलिस स्टेशनों में से 419 में सब-इंस्पेक्टर एसएचओ का पद संभालेंगे। इससे पिछली सरकार का वह फैसला पलट दिया गया है, जिसमें यह जिम्मेदारी सर्कल इंस्पेक्टरों को सौंपी गई थी।
सर्कल इंस्पेक्टर सिर्फ 64 रणनीतिक रूप से अहम पुलिस स्टेशनों के इंचार्ज बने रहेंगे जबकि मुल्लापेरियार पुलिस स्टेशन अपनी रणनीतिक अहमियत की वजह से डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा।
पुलिसिंग में महिलाओं की लीडरशिप को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार 63 पुलिस स्टेशनों की कमान महिला सब-इंस्पेक्टर संभालेंगी।
इस सुधार के तहत एक नया निगरानी ढांचा भी बनाया जा रहा है, जिसमें 200 पुलिस सर्कल बनाए जाएंगे और सर्कल इंस्पेक्टर नए नियुक्त एसएचओ की निगरानी और मार्गदर्शन करेंगे।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुलिस स्टेशनों में आने वाले नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाना है, जिसके लिए समय पर सम्मानजनक और कुशल सेवा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया है।
सरकार ने यह भी साफ तौर पर कहा है कि नए पुलिसिंग मॉडल का मकसद हिरासत में होने वाले अपराधों, जिनमें हिरासत में मौत और टॉर्चर शामिल हैं, को पूरी तरह खत्म करना है। सरकार ने 'थर्ड-डिग्री' तरीकों को लोकतांत्रिक समाज में गैर-कानूनी, अमानवीय और अस्वीकार्य बताया है।
इस बदलाव में मदद के लिए हाल ही में नियुक्त सभी एसएचओ, पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों और सुपरवाइजरी अधिकारियों को चरणों में ओरिएंटेशन ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें लोगों के साथ व्यवहार, लीडरशिप और टेक्नोलॉजी-आधारित पुलिसिंग पर खास जोर दिया जाएगा।
ट्रेनिंग में साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे से निपटने पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिसमें लोन-ऐप फ्रॉड और ऑनलाइन फाइनेंशियल स्कैम शामिल हैं।
सरकार दो दशक पुराने 'जनमैत्री सुरक्षा प्रोजेक्ट' को फिर से शुरू करने की योजना भी बना रही है। उसका कहना है कि पिछले कुछ सालों में कम्युनिटी पुलिसिंग काफी हद तक मशीनी हो गई है।
इस सुधार की एक मुख्य विशेषता एक स्वतंत्र फ़ीडबैक व्यवस्था है, जिसके तहत रेंज डीआईजी हर पुलिस स्टेशन से जनता की मासिक प्रतिक्रिया (फ़ीडबैक) इकट्ठा करेंगे और उसकी समीक्षा करेंगे।
एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) राज्य पुलिस प्रमुख की देखरेख में इस प्रोजेक्ट का समन्वय करेंगे और वे सरकार को मासिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे।
अगर इस पहल को पूरी तरह और सही भावना के साथ लागू किया जाए, तो यह केरल पुलिस में सबसे बड़े स्ट्रक्चरल और कल्चरल बदलावों में से एक हो सकता है। इससे युवा अधिकारियों पर ज़्यादा जिम्मेदारी आएगी और पुलिस स्टेशनों के प्रति लोगों का भरोसा फिर से बनाने में मदद मिलेगी, ताकि वे नागरिकों को डराने-धमकाने के बजाय उनकी सेवा करने वाले संस्थान के तौर पर देखे जाएं।
--आईएएनएस
एसएचके/पीएम