फ्रांस में विरोध प्रदर्शन बने हिंसक, 997 पुलिसकर्मी घायल, सरकार ने लगाया कर्फ्यू
पेरिस, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को कहा कि सप्ताह के अंत पर हुए प्रदर्शनों के दौरान लूटपाट की घटनाओं के बाद सोमवार की शाम से कुछ इलाकों में आंशिक कर्फ्यू लगा दिया गया है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेकोर्नू ने कहा कि उन्होंने फ्रांस के प्रीफेक्ट्स से कई जगहों पर आंशिक कर्फ्यू लागू करने को कहा है, और बताया कि यह अव्यवस्था शहरी केंद्रों के बहुत सीमित इलाकों तक सीमित है।
लेकोर्नू ने कहा कि जरूरत पड़ने पर आपातकाल की स्थिति घोषित की जाएगी, लेकिन उन्होंने कहा कि कर्फ्यू ज्यादा उचित लग रहा है। लूटपाट को बढ़ने देने का कोई सवाल ही नहीं है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, पीएम लेकोर्नू ने बताया कि गृह मंत्रालय सोमवार दोपहर के दौरान प्रभावित इलाकों का विस्तृत नक्शा जारी करेगा।
लेकोर्नू ने कहा कि नुकसान और लूटपाट से प्रभावित दुकानदारों के लिए मंगलवार से आंशिक बेरोजगारी के उपाय लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित कारोबारों की मदद के लिए सार्वजनिक फंडिंग भी मुहैया कराएगी, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि अगर हम जल्द से जल्द व्यवस्था बहाल करने में सक्षम नहीं हैं तो ऐसी मदद का कोई मतलब नहीं है।
फ्रांस के व्यापार मंत्री सर्ज पापिन ने अनुमान लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 3,000 कारोबार प्रभावित हुए हैं।
फ्रांस में शनिवार को करीब 5,50,000 लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। फ्रांस के गृह मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, हिंसा से प्रभावित रहे इन प्रदर्शनों के दौरान कुल 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कुल 997 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए, जिनमें से सात गंभीर रूप से घायल हैं।
दक्षिणी फ्रांस के बूश-दु-रोन के पुलिस प्रीफेक्चर ने सोमवार को पुलिस प्रीफेक्चर की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा,"मार्सिले शहर में दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे तक) सभी सभाओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया।"
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।
सप्ताह के अंत में यूरोप के बड़े शहरों की सड़कों पर हजारों लोग उमड़ पड़े, जिन्होंने बढ़ती जीवन-यापन लागत, आवास की कमी और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया।
--आईएएनएस
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