घुसपैठ के दौरान लश्कर-ए-तैयबा को बड़ा नुकसान, टॉप कमांडर समेत 4 आतंकी ढेर
जम्मू, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। सोमवार को नियंत्रण रेखा (एलईटीटी) के पास लैंडमाइन विस्फोट में लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर समेत चार आतंकवादी मारे गए। ये आतंकवादी जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे।
मृत आतंकवादियों की पहचान एलईटीटी के शीर्ष कमांडर मोहम्मद फैजान, मोहम्मद इश्तियाक, मोहम्मद वकास और मोहम्मद आसिम के रूप में हुई है।
ये सभी जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की हाजिरा तहसील के मंडला, मदपुर के निवासी थे।
अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादियों का यह समूह आज दोपहर कृष्णा घाटी (केजी) सेक्टर के नांगी तकरी इलाके में नियंत्रण रेखा पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी उन्होंने एक माइन को सक्रिय कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि जोरदार विस्फोट में चारों आतंकवादी मौके पर ही मारे गए।
विस्फोट स्थल सतवाल-नाकी/नांगी तकरी क्षेत्र में है, जो सीमा पार से घुसपैठ करने वाले लोगों द्वारा भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक जाना-पहचाना मार्ग है।
घुसपैठिए सीधे भारी सुरक्षा से घिरे अग्रिम बारूदी सुरंग क्षेत्र में चले गए, जो भारतीय सेना के घुसपैठ-रोधी अवरोधों के जाल का एक केंद्रीय हिस्सा है।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने निगरानी बढ़ा दी है और क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। सीमा की गहन जांच और किसी भी समन्वित घुसपैठ की संभावना को खत्म करने के लिए घात लगाकर हमला करने वाली टुकड़ियों और सीमा गश्ती दल को भारी संख्या में तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि अग्रिम क्षेत्रों में बारूदी सुरंगों की भारी सुरक्षा व्यवस्था है।
हालांकि, हाल ही में क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण ऊपरी मिट्टी बह गई है, जिससे पुरानी या गहराई में दबी हुई बारूदी सुरंगें अप्रत्याशित रूप से सतह पर आ गई हैं या खिसक गई हैं।
इस घटना से कुछ ही दिन पहले, सेना के बम निरोधक दस्ते ने पड़ोसी मेंढर सेक्टर में सीमा बाड़ के पास उजागर हुई पांच अन्य पुरानी बारूदी सुरंगों का सुरक्षित रूप से पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय कर दिया था।
पूंछ और राजौरी जिलों (जिन्हें सामूहिक रूप से पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के दक्षिण में स्थित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है) में घुसपैठ के पारंपरिक रास्ते घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और मौसमी नालों से घिरे हुए हैं।
ऐतिहासिक रूप से, ये सीमावर्ती गलियारे सीमा पार करने के रास्ते के रूप में काम करते हैं, जहां आतंकवादी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित लॉन्च पैड से नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करके पीर पंजाल पर्वतमाला की ऊंची चोटियों तक पहुंचते हैं। वहां से, वे या तो स्थानीय जंगलों में अस्थायी ठिकाने बनाते हैं या उत्तर की ओर अल्पाइन दर्रों से होते हुए कश्मीर घाटी में प्रवेश करते हैं।
इन दोनों जिलों के अत्यधिक सक्रिय क्षेत्रों और विशिष्ट पारंपरिक मार्गों को स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कई प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है।
--आईएएनएस
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