बालेंद्र शाह के भारत दौरे से पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री 11 मई को जाएंगे नेपाल
काठमांडू, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने नेपाल के साथ व्यापक परामर्श के तहत विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11–12 मई को नेपाल यात्रा का प्रस्ताव रखा है। यह यात्रा नव-निर्वाचित नेपाली प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की भारत यात्रा से पहले होगी।
'द काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने मिस्री को औपचारिक निमंत्रण भी भेज दिया है। नेपाल के प्रधानमंत्री शाह को पहले ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से भारत आने का न्योता मिल चुका है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इसकी पुष्टि की है।
खनाल ने यह भी कहा कि इस यात्रा में थोड़ा समय लग सकता है, क्योंकि सरकार पहले अपनी प्राथमिकताएं तय करेगी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच करीब 40 द्विपक्षीय तंत्र (बाइलेटरल मैकेनिज्म) काम करते हैं, जो सुरक्षा, जल संसाधन, सिंचाई, सीमा प्रबंधन, व्यापार और कृषि जैसे मुद्दों को कवर करते हैं। इन पर तकनीकी स्तर की तैयारियां भी जरूरी हैं।
27 मार्च को प्रधानमंत्री शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद काठमांडू में कई बड़े राजनयिक दौरे हो चुके हैं। हाल ही में नेपाल ने अमेरिका और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों की मेजबानी की है और अब भारत भी अपने शीर्ष राजनयिक को भेजने की तैयारी में है।
पिछले हफ्ते अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर नेपाल आए थे। इसी दौरान चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के उप महानिदेशक काओ जिंग ने भी काठमांडू का दौरा किया और वहां के अधिकारियों से बातचीत की।
10 अप्रैल को विदेश मंत्री खनाल ने मॉरीशस में आयोजित हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने नेपाल की प्राथमिकताओं के अनुसार भारत की ओर से समर्थित परियोजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
रिपोर्ट के अनुसार, खनाल नेपाल में चल रही भारत समर्थित परियोजनाओं की समीक्षा भी कर रहे हैं, जिनमें उनकी प्रगति, चुनौतियां और आगे सहयोग के नए मौके शामिल हैं।
फिलहाल नेपाल में भारत की आर्थिक और तकनीकी मदद से कई परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में चल रही हैं। भारत नेपाल का एक प्रमुख विकास साझेदार भी है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत नेपाल को 107.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता देने वाला सबसे बड़ा द्विपक्षीय दाता रहा है।
--आईएएनएस
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