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पश्चिम बंगाल : रक्षाबंधन पर ईआर का महिला सशक्तिकरण और कर्मचारियों के कल्याण पर फोकस

 

कोलकाता, 28 अगस्त (आईएएनएस)। ईस्टर्न रेलवे (ईआर) ने शुक्रवार को रक्षाबंधन को एक अनोखे तरीके से मनाया। इसके लिए महिला कर्मचारियों के साथ एक संवादात्‍मक सत्र आयोजित किया गया और कई कल्याणकारी उपायों की घोषणा की गई।

ईआर की जनरल मैनेजर गीतिका पांडे ने महिला सशक्तिकरण पर संवादात्‍मक सत्र की मेजबानी की। अपने संबोधन में उन्होंने प्रोफेशनल ग्रोथ और कार्यस्‍थल पर कर्मचारियों के कल्‍याण पर जोर दिया। महिला कर्मचारियों को खुली बातचीत के जरिए अपने अनुभव, नजरिए और सुझाव साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने त्रियाशा पॉल को एक खास ट्रैक साइकिल भी भेंट की। त्रियाशा एक बेहतरीन ट्रैक साइक्लिस्ट हैं और इस साल के आखिर में जापान में होने वाले एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

उन्होंने मेडल जीतने वाली तीरंदाज सोनिया ठाकुर और लक्ष्मी हेम्ब्रम को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए तीर भी सौंपे।

कर्मचारियों के सर्वांगीण कल्याण पर ध्यान देते हुए भविष्य की कई असरदार पहलों और वर्कशॉप की घोषणा की गई। इनमें 'आर्ट ऑफ लिविंग' सेशन, रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए खास तौर पर तैयार किए गए वेल्थ और हेल्थ मैनेजमेंट प्रोग्राम, महिला कर्मचारियों के लिए खास वेल्थ मैनेजमेंट सलाह के साथ-साथ प्रैक्टिकल न्यूट्रिशन टिप्स, यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूकता के लिए वर्कशॉप और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सेशन शामिल हैं।

मदद की जरूरत वाले किसी भी कर्मचारी के लिए आमने-सामने मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग के लिए एक खास काउंसलिंग रूम भी बनाया जा रहा है। साथ ही, फेयरली प्लेस में लेडीज टिफिन कक्ष की सुविधाओं को बेहतर बनाकर और न्यू कोयलाघाट बिल्डिंग में नए लेडीज टिफिन कक्ष के लिए सही जगह की पहचान करके वर्कप्लेस पर भौतिक सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है।

रेलवे में दशकों से महिला कर्मचारी रही हैं, लेकिन अब वे सिर्फ कार्यालय तक ही सीमित नहीं हैं। महिलाएं अब फ्रंटलाइन ऑपरेशनल स्टाफ के तौर पर काम कर रही हैं। कुछ लोको पायलट के तौर पर मेल, एक्सप्रेस, मालगाड़ी और सबअर्बन ट्रेनें चलाती हैं, जबकि दूसरी महिलाएं यार्ड और वर्कशॉप में हर तरह के काम संभालती हैं।

एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा, "जब से उन्होंने पद संभाला है, जनरल मैनेजर ने महिला कर्मचारियों के सशक्तिकरण पर ध्यान दिया है। उन्होंने जोर दिया है कि सभी यूनिट में उनके लिए सही सुविधाएं होनी चाहिए। पुरुषों को भी अपनी महिला सहकर्मियों की भावनाओं को समझने और उसी के अनुसार व्यवहार करने, यानी उन्हें सम्मान देने के लिए संवेदनशील बनाया जा रहा है। उनके आने से पहले भी किसी भी तरह का उत्पीड़न, चाहे वह यौन हो या कोई और, बर्दाश्त नहीं किया जाता था। ऐसी पहलों से हालात और बेहतर होंगे।"

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम