410 किमी की ‘हुगली संकल्प’ नौकायन यात्रा पूरी कर कोलकाता पहुंचे एनसीसी कैडेट
कोलकाता, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों की 410 किलोमीटर लंबी नौकायन (सेलिंग) अभियान 'हुगली संकल्प- मेन्यू 2026' की शुरुआत गुरुवार को मैन ओ' वार जेट्टी से की गई। इस अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
फरक्का से शुरू हुए इस कठिन अभियान को पूरा करने के बाद 60 नौसैनिक एनसीसी कैडेटों (लड़के और लड़कियां) का उत्साहवर्धन किया गया। जब उन्होंने अपनी 410 किलोमीटर लंबी नौकायन यात्रा पूरी कर चप्पू चलाना बंद किया, तो वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।
सैकड़ों लोगों ने देखा कि व्हेलर नौकाएं, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के एक पोत और विशेष सुरक्षा नौकाओं के साथ, हुगली नदी के रास्ते शानदार ढंग से कोलकाता पहुंचीं। वरिष्ठ अधिकारियों और गर्व महसूस कर रहे परिवार के सदस्यों ने जोश के साथ तालियां बजाकर कैडेट्स का स्वागत किया।
इस शानदार स्वागत समारोह के साथ ही एक्सपीडिशन कमांडर संजीव शरण और सुरक्षा अधिकारी कमांडर मृण्मय घोष की अगुवाई में फरक्का से कोलकाता तक की मुश्किल लेकिन बहुत फायदेमंद यात्रा सफलतापूर्वक पूरी हुई।
एक अधिकारी ने कहा, "नागरिक-सैन्य तालमेल और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए शुरू किया गया 'हुगली संकल्प' एक आम एडवेंचर मिशन से कहीं बढ़कर था। यात्रा के दौरान 'फ्लोटिंग क्लासरूम' ने असरदार कम्युनिटी आउटरीच और पर्यावरण व नदी की सेहत से जुड़े कामों के जरिए अनगिनत लोगों की जिंदगी को छुआ। इसमें गंगा डॉल्फिन के संरक्षण को बढ़ावा देना, पानी की शुद्धता की लाइव जांच करना और बारिश के पानी को इकट्ठा करने व कम लागत वाले शुद्धिकरण मॉडल का प्रैक्टिकल प्रदर्शन करना शामिल था।"
यात्रा के दौरान रुकने की जगहों पर कैडेट्स ने लोगों को मोटे अनाज (मिलेट्स) खाने के लिए प्रोत्साहित किया और उनसे चल रहे 'नशा मुक्त भारत अभियान' का हिस्सा बनने की अपील की।
अधिकारी ने बताया, "स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान कैडेट्स ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर भी चर्चा की, ताकि न सिर्फ डिवाइस को गलत इस्तेमाल से बचाया जा सके बल्कि साइबर धोखाधड़ी को भी रोका जा सके। उन्होंने ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) जैसे मुद्दों पर भी बात की, जिससे सर्वाइकल कैंसर हो सकता है और युवा लड़कियों के लिए वैक्सीन लगवाने की जरूरत पर जोर दिया।"
एनसीसी कैडेट्स ने बाल विवाह विरोधी अभियानों में भी हिस्सा लिया। जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़कर उन्होंने राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। उन्होंने भारत-बांग्लादेश सीमा का दौरा भी किया और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवानों से बातचीत की। सीमा की सुरक्षा में उनकी भूमिका की तारीफ करते हुए कैडेट्स ने उनकी कलाइयों पर राखियां बांधीं।
अधिकारी ने कहा, "सीखने की प्रक्रिया के तहत उन्होंने कई ऐतिहासिक जगहों के अलावा एनटीपीसी पावर प्लांट का भी दौरा किया। इस यात्रा ने उत्सर्जन और लागत को कम करने के लिए परिवहन के एक अच्छे विकल्प के तौर पर जलमार्गों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया।"
इस अभियान ने आईडब्ल्यूएआई के साथ मिलकर नेशनल वॉटरवे-1 (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) की उस बड़ी क्षमता को उजागर किया, जिसका इस्तेमाल सामान और लोगों के टिकाऊ परिवहन के लिए किया जा सकता है। पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के साधन के तौर पर, जलमार्ग सड़क परिवहन की तुलना में लागत में 50-60 प्रतिशत की बचत करते हैं।
सरकार कार्गो (माल) की ढुलाई के लिए जलमार्गों के इस्तेमाल पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। यह अभियान पश्चिम बंगाल और सिक्किम डायरेक्टरेट के कैडेट्स ने चलाया था। उन्होंने 25 सितंबर को फरक्का लॉक गेट से अपनी यात्रा शुरू की थी।
इस अभियान को पश्चिम बंगाल और सिक्किम डायरेक्टरेट के एनसीसी और एडीजी मेजर जनरल ए.पी.एस. चहल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
--आईएएनएस
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