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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का पलायन डर और असुरक्षा का नतीजा: रिपोर्ट

 

वॉशिंगटन, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान से ईसाई, हिंदू समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का लगातार पलायन देश में बढ़ते डर और असुरक्षा के माहौल को दर्शाता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1947 के बाद से ही धार्मिक अल्पसंख्यक सामाजिक भेदभाव, संस्थागत असमानता और लक्षित हिंसा का सामना करते रहे हैं।

अमेरिका स्थित ‘ग्लोबल स्ट्रैट व्यू’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में आज कई अल्पसंख्यक लड़कियां डर के साए में जी रही हैं। जबरन धर्म परिवर्तन, कम उम्र में शादी और कानूनों के कमजोर क्रियान्वयन के कारण उन्हें यह महसूस होता है कि क्या देश का संविधान वास्तव में उनके अधिकारों की रक्षा करता है या नहीं।

रिपोर्ट में ह्यूमन राइट्स वॉच और एम्नेस्टी इंटरनेशनल की पूर्व रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन, नाबालिग विवाह और कानून के कमजोर पालन जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले चुकी हैं।

इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि शांति नगर (1997), गोजरा और जरणवाला जैसे सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में अक्सर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी या अधूरी न्याय प्रक्रिया देखने को मिली है।

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में एक नाबालिग ईसाई लड़की मारिया शाहबाज के मामले में पाकिस्तान की फेडरल कॉन्स्टीट्यूशनल कोर्ट के फैसले ने भी चिंता बढ़ाई है। अदालत ने उसकी शादी को बरकरार रखा और उसे वापस लाने की याचिका खारिज कर दी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह फैसला दिखाता है कि संवैधानिक सुरक्षा कई बार समान रूप से लागू नहीं हो पाती।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और ‘मूवमेंट फॉर सॉलिडेरिटी एंड पीस’ की रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल सैकड़ों जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह के मामले सामने आते हैं। कानूनी उपाय मौजूद होने के बावजूद प्रशासनिक देरी, सामाजिक दबाव और व्यवस्था संबंधी खामियों के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में मुश्किल होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमित राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक असमानता भी अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना को बढ़ाते हैं। यदि समानता, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो यह पलायन जारी रहेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की विश्वसनीयता और मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों की कितनी सुरक्षा कर पाता है।

--आईएएनएस

डीएससी