नकली दवा रैकेट पर कर्नाटक एसआईटी का बड़ा एक्शन, 6 राज्यों में 10 ठिकानों पर छापेमारी
बेंगलुरु, 11 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने हाल ही में बेंगलुरु के बाहरी इलाके रामनगर जिले के डोड्डेरी में सामने आए नकली दवा रैकेट की जांच के सिलसिले में देशभर में 10 जगहों पर छापेमारी की। शुक्रवार को कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में कई जगहों पर ये छापे मारे गए।
नकली दवा नेटवर्क की चल रही जांच के तहत एसआईटी और ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने मिलकर यह ऑपरेशन चलाया। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, मुंबई, चेन्नई और तेलंगाना में कई जगहों पर छापेमारी की गई।
तलाशी अभियान में लगभग 80 से 100 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। इसमें उन कंपनियों के ऑफिस, प्रॉपर्टी और दूसरी जगहों को निशाना बनाया गया जो नकली दवाएं बनाने, रीपैकेजिंग करने और सप्लाई करने में शामिल थीं।
जांच के हिस्से के तौर पर बेंगलुरु में लालबाग के पास मिनर्वा सर्कल में एक फार्मास्युटिकल कंपनी के परिसर में तलाशी ली गई।
अधिकारी उन दवाओं की जांच कर रहे हैं जो अलग-अलग जगहों से मंगाई गई थीं और बाद में नेटवर्क के जरिए रीपैकेज या सप्लाई की गई थीं। जांच में कथित तौर पर एक इंटरनेशनल कनेक्शन का पता चला है, जिसमें नकली लेबल विदेशों से मंगाए जा रहे थे।
यह छापेमारी उस रैकेट की जांच के सिलसिले में की गई, जिसका पता करीब दो सप्ताह पहले चला था। जांचकर्ता सप्लाई चेन, दवाओं के सोर्स, मैन्युफैक्चरिंग और रीपैकेजिंग सुविधाओं के साथ-साथ डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की भी जांच कर रहे हैं।
यह मामला अगस्त 2026 में तब सामने आया, जब फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफएसडीए) और स्थानीय पुलिस ने रामनगर जिले के बिदादी के पास नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया। अधिकारियों ने लगभग 5 करोड़ रुपए की नकली दवाएं जब्त कीं और बिदादी टोल गेट के पास कुरुबारा करेनहल्ली में एक फार्महाउस से चल रही बिना लाइसेंस वाली रीपैकेजिंग सुविधा का पता लगाया।
जांच के अनुसार, कम कीमत वाली, घटिया या एक्सपायर हो चुकी दवाएं अलग-अलग राज्यों से मंगाई जाती थीं। इन दवाओं को नई शीशियों में भरकर महंगे और मशहूर मल्टीनेशनल फार्मास्युटिकल ब्रांडों के नाम वाले नकली लेबल लगाकर रीपैकेज किया जाता था और फिर बहुत ज्यादा कीमतों पर बेचा जाता था।
यह रैकेट तब और भी गंभीर हो गया, जब अधिकारियों को पता चला कि कुछ नकली दवाएं अस्पतालों के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में इस्तेमाल के लिए थीं। ये दवाएं प्राइवेट अस्पतालों और फार्मेसियों को बाजार भाव से लगभग 50 प्रतिशत कम कीमत पर सप्लाई की जाती थीं।
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने इस मामले को ड्रग माफिया का एक बड़ा ऑपरेशन बताया था और संदिग्ध अंतर-राज्यीय नेटवर्क की जांच के आदेश दिए थे। एसआईटी के गठन का मकसद बड़े नेटवर्क की पहचान करना और दवाओं को मंगाने, रीपैकेजिंग करने, लेबल लगाने और डिस्ट्रीब्यूट करने में शामिल लोगों का पता लगाना था। छह राज्यों में हाल ही में हुई छापेमारी से जांचकर्ताओं को नेटवर्क के दायरे का पता लगाने और नकली दवाइयों की सप्लाई में शामिल अन्य लोगों और कंपनियों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिकारी जारी जांच के तहत कथित अंतरराष्ट्रीय संबंधों और नकली लेबल के स्रोत की भी जांच कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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