भारत-इटली संबंध निर्णायक चरण में, गति पहले से तेज: पीएम मोदी, मेलोनी
रोम, 20 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने बुधवार को कहा कि भारत और इटली अपनी गहरी रणनीतिक साझेदारी और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत कर वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि जॉर्जिया मेलोनी के साथ एक जॉइंट ओप-एड लिखा है, जिसमें भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध कैसे एक अहम मोड़ पर पहुंच गए हैं इसकी झलक मिलती है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच का रिश्ता एक स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है और इस बात पर यह मजबूत रिश्ता इनोवेशन, साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों और भविष्य के एक कॉमन विजन के साथ मजबूती से चलता है।
उन्होंने एक्स पर लिखा, "पीएम मेलोनी के साथ एक ओप-एड लिखा है कि भारत-इटली के संबंध कैसे एक अहम मोड़ पर पहुंच गए हैं। हमारी एक स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है जो नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण पर चलती है।"
संयुक्त ओप एड में दोनों नेताओं ने माना कि द्विपक्षीय रिश्ते परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और इटली की पीएम मेलोनी ने लिखा, " भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यह सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदल गए हैं।"
उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और इटली अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए लगातार राजनीतिक संवाद और संस्थागत सहयोग पर काम कर रहे हैं।
ओप एड में आगे लिखा गया, "ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से आगे बढ़ रही है और अब एक नए तथा व्यापक आयाम हासिल कर रही है, जो हमारी आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को साथ जोड़ती है।"
दोनों शीर्ष नेता मानते हैं कि समृद्ध भविष्य और सुरक्षा का आधार इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन और रणनीतिक संप्रभुता ही होगी।
आगे लिखा, "हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन के प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा डाइवर्स बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके।"
पीएम मोदी और मेलोनी ने आगे कहा कि भारत और इटली “शक्तिशाली तालमेल” बनाकर आगे बढ़ने का लक्ष्य रख रहे हैं, जिसमें इटली की डिजाइन, निर्माण और सुपरकंप्यूटिंग क्षमता को भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, इंजीनियरिंग प्रतिभा और नवाचार-प्रधान स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा।
दोनों के मुताबिक यह केवल साधारण इंटीग्रेशन नहीं होगा, बल्कि ऐसा साझा वैल्यू क्रिएशन होगा जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और मजबूत बनाएंगी।
ओप-एड में औद्योगिक सहयोग और व्यापार पर भी जोर दिया गया। कहा गया कि भारत और इटली मिलकर ‘मेड इन इटली’ और ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत को जोड़ेंगे, जबकि एफटीए और निवेश लक्ष्यों के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार 2029 तक 20 अरब यूरो तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
नेताओं ने दोनों देशों के व्यवसायों की उभरती औद्योगिक उपस्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया।
आगे लिखा, "इस संदर्भ में भारत के लिए प्रोडक्शन को लेकर इटली की कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती मौजूदगी, जिनकी संख्या अब दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है जो हमारी सप्लाई चेन के इंटीग्रेशन को और मजबूत करेगा।"
लेख में तकनीक और नवाचार को साझेदारी का केंद्र बताया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत निर्माण और डिजिटल अवसंरचना में सहयोग पर जोर है, जिसमें मानव-केंद्रित और नैतिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। भारत की एमएएनएवी (मानव) अवधारणा और इटली की ‘एलगोर-इथिक्स’ इसमें मार्गदर्शक होंगी।
ओप एड में तकनीकी विकास के साए तले लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात कही गई है।
उन्होंने कहा, "एआई को इंसानों द्वारा इंसानों के लिए बनाए गए एक माध्यम के रूप में देखने का मतलब यह स्पष्ट करना है कि टेक्नोलॉजी न तो लोगों की जगह ले सकती है, न उनके मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और न ही इसका इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदलने के लिए होना चाहिए। तेजी से जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा को लेकर हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।"
ओप-एड में अंतरिक्ष, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी प्रकाश डाला गया। भारत के सैटेलाइट और स्पेस टेक्नोलॉजी में प्रगति और इटली की एयरोस्पेस विशेषज्ञता से संयुक्त परियोजनाओं के अवसर पैदा होंगे।
लेख के अनुसार, "स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की प्रभावशाली प्रगति, साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली की उत्कृष्ट क्षमता, संयुक्त पहलों और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।"
इसमें लिखा है, " सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी देशों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी बनी हुई हैं। इटली और भारत डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।"
ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को भी दोनों देशों के संबंधों का अहम स्तंभ बताया गया।
आर्टिकल में ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का जिक्र है। इसमें लिखा है," डाइवर्सिफाइड एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहे ग्लोबल ट्रांजिशन को नवाचार, निवेश और सहयोग की जरूरत है। भारत और इटली रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी तक, और स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने की भारत की पहल जहां अपार संभावनाएं प्रदान करती है, वहीं यह रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में इटली की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और यूरोप के लिए एनर्जी गेटवे के रूप में उसकी रणनीतिक भूमिका के साथ पूरी तरह मेल खाती है। "
दोनों नेताओं ने इंडो-मेडिटरेनियन कॉरिडोर और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा की रणनीतिक और आर्थिक महत्व को भी रेखांकित किया।
लिखा, "फिजिकल, डिजिटल और मानवीय कनेक्टिविटी वह कड़ी है जो हमें एक साथ जोड़ती है। भारत और इटली दोनों ग्लोबल अर्थव्यवस्था के दो अहम केंद्रों, इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन, के मध्य स्थित हैं। इन क्षेत्रों को अलग-अलग दायरों के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जाना चाहिए।"
अंत में, पीएम मोदी और पीएम मेलोनी ने कहा कि गहन साझेदारी और सांस्कृतिक रिश्तों का आधार लेकर ही हम साझा वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने भारतीय दर्शन की अवधारणाओं ‘धर्म’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और इटली की मानवतावादी परंपराओं को साझा दृष्टिकोण का आधार बताया।
--आईएएनएस
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