नेपाल बाढ़ त्रासदी को लेकर चीन पर गंभीर आरोप, पूर्व मंत्री बोले- आपदा से पहले नहीं दी चेतावनी
नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 734 लोगों की जान जा चुकी है। नेपाल के पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने दावा किया है कि आपदा से पहले चीन ने कोई चेतावनी जारी नहीं की थी।
पूर्व मंत्री ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि बुधवार सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा पर बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल प्रवाह आने से पहले नेपाल को चीन की ओर से कोई समय पर अलर्ट नहीं मिला। उन्होंने इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा न किए जाने को 'मानवता के खिलाफ' बताया।
चीन के इस दावे को खारिज करते हुए कि ग्लेशियर का ध्वंस नेपाल की सीमा के भीतर शुरू हुआ था, चौलागाईं ने कहा कि यह आपदा तिब्बत में शुरू हुई थी।
उन्होंने कहा, "स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और मामले में अधिक पारदर्शिता की मांग की। इस आपदा ने योजना और तैयारी से जुड़ी बड़ी खामियों को भी उजागर किया है।"
उनके अनुसार, नेपाल की शुरुआती चेतावनी प्रणाली और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए किए जाने वाले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन मुख्य रूप से ग्लेशियर झीलों (ग्लेशियल लेक्स) पर केंद्रित थे, लेकिन यह त्रासदी बर्फ और चट्टानों के गिरने तथा ग्लेशियर से पोषित नदी प्रणाली के ध्वस्त होने से जुड़ी थी, जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी।
इस बीच, एक अंतरराष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के वीडियो हटवा रहा है।
द टाइम्स ऑफ इजराइल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लेशियर के टूटने से मिट्टी, चट्टानों और पानी का भारी सैलाब ल्हेंडे खोला से होते हुए भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पहुंचा, जिससे नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में व्यापक तबाही हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ आने के कुछ ही घंटों के भीतर इस आपदा के वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने लगे थे।
सुरक्षा कैमरों की फुटेज में देखा गया कि ग्यिरोंग पोर्ट पर मिट्टी और मलबे की एक विशाल लहर इमारतों पर टूट पड़ी, जबकि लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन वीडियो और घटनास्थल की पुष्टि बाद में अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों द्वारा भी की गई।
रिपोर्ट में एक भूटानी पत्रकार का भी हवाला दिया गया है, जिन्होंने कहा कि चीनी प्लेटफॉर्म से बाढ़ से जुड़े वीडियो हटाए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सामग्री किसी राजनीतिक विरोध या सरकार विरोधी गतिविधि की नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा की फुटेज थी।
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 26 अगस्त को आई इस आपदा में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
--आईएएनएस
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