बांग्लादेश में अवामी लीग के नेता की मौत पर मचा बवाल, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
ढाका, 7 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के पूर्व मंत्री और सीनियर अवामी लीग नेता रमेश चंद्र सेन की शनिवार को दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस कस्टडी में बीमार पड़ने के बाद मौत हो गई। स्थानीय मीडिया ने आधिकारिक सोर्स के हवाले से यह जानकारी दी है।
इस घटना ने बांग्लादेश की जेलों में अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों की हिरासत में मौतों की बढ़ती संख्या में इजाफा कर दिया है। इससे मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत राजनीतिक दमन और टारगेटेड कार्रवाई के आरोप और तेज हो गए हैं।
बता दें, सेन पहले जल संसाधन मंत्री थे और ठाकुरगांव-1 (सदर उपजिला) निर्वाचन क्षेत्र से सांसद थे। उन्हें शनिवार सुबह 9:29 बजे दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
बांग्लादेश के अखबार द ढाका ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वह सुबह-सुबह बीमार पड़ गए और उन्हें लगभग 9:10 बजे दिनाजपुर जिला जेल से अस्पताल ले जाया गया। जेल प्रशासन के सूत्रों ने द ढाका ट्रिब्यून को बताया कि सेन को पिछले साल 16 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें दिनाजपुर जिला जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।
खबर है कि उन पर तीन अलग-अलग मामले चल रहे थे, जिसमें एक मर्डर से जुड़ा केस भी शामिल था। जेल अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले की पुष्टि करते हुए दिनाजपुर डिस्ट्रिक्ट जेल सुपरिटेंडेंट फरहाद सरकार ने कहा कि सभी लीगल फॉर्मैलिटी और प्रक्रिया पूरे होने के बाद बॉडी को मृतक नेता के परिवार को सौंप दिया जाएगा।
रमेश चंद्र सेन का जन्म 30 अप्रैल, 1940 को ठाकुरगांव जिले के सदर उपजिला के रुहिया यूनियन के तहत कशलगांव गांव में हुआ था। वह क्षितिंद्र मोहन सेन और बालेश्वरी सेन के बेटे थे। पब्लिक लाइफ और पॉलिटिक्स में आने से पहले उन्होंने रंगपुर कारमाइकल कॉलेज से हायर एजुकेशन पूरी की।
अपने राजनीतिक सफर के दौरान सेन पांच बार बांग्लादेश पार्लियामेंट के लिए चुने गए। हाल ही में, उन्होंने बांग्लादेश अवामी लीग से नॉमिनेशन मिलने के बाद 2024 में संसदीय सीट हासिल की।
2024 में बड़े पैमाने पर छात्रों और जनता की बगावत के बीच अवामी लीग सरकार गिरने के बाद उनका संसदीय कार्यकाल अचानक खत्म हो गया।
-आईएएनएस
केके/एबीएम