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मानवाधिकार संस्था ने पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और ऑनर किलिंग की निंदा की

 

इस्लामाबाद, 25 सितंबर (आईएएनएस)। अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा की निंदा की है। संगठन ने देश भर में पीड़ित को ही दोषी ठहराने, उत्पीड़न और तथाकथित "ऑनर किलिंग" (सम्मान के नाम पर हत्या) की गहरी जड़ें जमा चुकी संस्कृति की ओर इशारा किया है।

'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) के अनुसार, महिलाओं के साथ हिंसा होने के बाद अक्सर उनके कपड़ों, आने-जाने, चरित्र और निजी पसंद को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

वीओपीएम ने कहा, "पाकिस्तान में किसी महिला के साथ रेप हो सकता है और फिर भी उससे पूछा जा सकता है कि उसने ऐसा क्या किया, जिसकी वजह से यह हुआ। उसके कपड़ों, जगह या चरित्र को लेकर उसे परेशान किया जा सकता है। 'ऑनर' (सम्मान) के नाम पर उसकी हत्या की जा सकती है। फिर भी लोग अपराध की निंदा करने के बजाय उसकी पसंद पर बहस करते हैं। यह सोच गलत है। महिला के कपड़ों की वजह से रेप नहीं होता। रात में यात्रा करने से हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता। भरोसे का मतलब सहमति नहीं होता। किसी पुरुष को मना करने का मतलब यह नहीं है कि उसे हमला करने या जान लेने का अधिकार मिल गया है।"

अधिकारों के लिए काम करने वाली इस संस्था ने तथाकथित "ऑनर किलिंग" (सम्मान के नाम पर हत्या) की प्रथा की भी निंदा की और कहा कि ऐसे अपराध महिलाओं पर नियंत्रण रखने और उन पर अपना हक जताने की सोच से प्रेरित होते हैं।

संस्था ने आगे कहा, "ऑनर किलिंग कोई परंपरा नहीं है। ये अपराध है। ये नियंत्रण, हक जताने और इस सोच से पैदा होते हैं कि महिला अपने परिवार की संपत्ति है। किसी पिता, भाई, पति या रिश्तेदार का महिला की जिंदगी पर मालिकाना हक नहीं होता। हत्या में कोई सम्मान नहीं होता।"

संकट की गंभीरता को बताते हुए वीओपीएम ने कहा कि पाकिस्तान में 2026 के शुरुआती छह महीनों में जेंडर-बेस्ड हिंसा (लिंग-आधारित हिंसा) के 3,172 मामले सामने आए। इनमें 644 हत्याएं, 514 यातना के मामले, 462 अपहरण, 363 आत्महत्याएं, 280 बलात्कार और 132 ऑनर किलिंग (सम्मान के नाम पर हत्या) शामिल हैं।

सामने आए मामलों में से 74 प्रतिशत पंजाब में और 17 प्रतिशत सिंध में दर्ज किए गए और इनमें से आधे से ज़्यादा मामले पीड़ितों के घरों में ही हुए।

वीओपीएम ने कहा, "असली संख्या इससे अधिक हो सकती है। कई महिलाएं हिंसा की रिपोर्ट नहीं करतीं। डर, शर्म, परिवार का दबाव और पुलिस पर भरोसा न होने की वजह से वे चुप रहती हैं।"

महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को संस्थागत नाकामियों का सबूत बताते हुए संगठन ने कहा, "हिंसा घर पर, सड़क पर या पुलिस स्टेशन के अंदर भी हो सकती है। महिलाओं को ट्रेंड पुलिस अधिकारियों, सही जांच, फोरेंसिक सपोर्ट, शिकायत करने के सुरक्षित सिस्टम, शेल्टर और तेजी से सुनवाई की जरूरत है।"

मानवाधिकार संस्था ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों को यह पक्का करना चाहिए कि देश में महिलाएं नहीं, बल्कि अपराधी डर के साये में जिएं।

वीओपीएम ने कहा, "महिलाओं की सुरक्षा एक अधिकार है। पाकिस्तान को महिलाओं को हिंसा से बचने के तरीके सिखाने के बजाय पुरुषों को हिंसा न करने की सीख देनी चाहिए। जो लोग हिंसा करते हैं और जो उन्हें बचाते हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।"

--आईएएनएस

ओपी/एएस