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बीएपीएस संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने एफिल टावर विवाद को 'गलतफहमी' बताया, बोले- प्रबंधन दोषी नहीं

 

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने पांच सितंबर को पेरिस के एफिल टावर में बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर अलग किए जाने से जुड़े विवाद को 'गलतफहमी' बताया है। उन्होंने कहा कि वह इस घटना के लिए एफिल टावर प्रबंधन को दोषी नहीं मानते।

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में 'बियॉन्ड इंटेलिजेंस: एआई, फेथ एंड द मीनिंग ऑफ बीइंग ह्यूमन' सत्र के दौरान बोलते हुए ब्रह्मविहारी स्वामी ने कहा कि मामले की जांच में यह नहीं पाया गया कि बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल ने पूरे जुलूस या कार्यक्रम से महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई स्पष्ट मांग की थी।

उन्होंने कहा, "यह एफिल टावर की तरफ से हुई एक गलतफहमी थी। मैं उन्हें भी इसके लिए दोष नहीं देता।"

विवाद उस समय शुरू हुआ, जब खबरें सामने आईं कि पांच सितंबर को बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी से हटा दिया गया था या उन्हें प्रतिनिधिमंडल की नजरों से दूर रखा गया था।

इस घटना के बाद कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे एफिल टावर को एक दिन के लिए बंद करना पड़ा। फ्रांस में इस मामले को लेकर काफी आलोचना हुई, क्योंकि वहां धर्मनिरपेक्षता और लैंगिक समानता को बहुत महत्व दिया जाता है।

बताया गया कि पेरिस शहर के महानिरीक्षण विभाग की जांच में ऐसा कोई लिखित सबूत नहीं मिला कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल ने पूरे कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को अलग रखने की मांग की हो।

फ्रांसीसी अखबार 'ले पेरिसियन' के अनुसार, जांच में संचार की कमी और सामूहिक स्तर पर हुई गड़बड़ी की बात सामने आई।

इस विवाद पर बात करते हुए ब्रह्मविहारी स्वामी ने कहा कि फ्रांस में मंदिर निर्माण की अनुमति पाने से पहले बीएपीएस ने करीब दस साल तक वहां के अधिकारियों के साथ लगातार संवाद किया था।

उन्होंने सीन नदी पर आयोजित एक सांस्कृतिक शोभायात्रा का भी उल्लेख किया, जिसमें लगभग 5,500 लोगों ने 11 नौकाओं पर हिस्सा लिया था।

स्वामी ने बताया कि एफिल टावर प्रबंधन ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि यात्रा सामान्य खुलने के समय में ही की गई ताकि दूसरे पर्यटकों को कोई परेशानी न हो। संतों की ओर से अपनाए जाने वाले धार्मिक अनुशासन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक संकल्प है। इसका मतलब महिलाओं का विरोध करना या उनके साथ भेदभाव करना नहीं है।

उन्होंने कहा, "हम संत अपने आध्यात्मिक नियमों का पालन करते हैं, लेकिन उन्हें किसी और पर लागू नहीं करते।"

मानव जीवन को सबसे ऊपर बताते हुए ब्रह्मविहारी स्वामी ने कहा कि अगर किसी महिला की जान खतरे में हो तो संतों को अपने सभी व्यक्तिगत नियमों को एक तरफ रखकर सबसे पहले उसकी मदद करनी चाहिए।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम