सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में ईडी ने पिनराई विजयन को भेजा समन, 23 अक्टूबर को पेश होने को कहा
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा है। एजेंसी ने उन्हें अगले सप्ताह शुक्रवार, 23 अक्टूबर को पेश होने को कहा है।
ईडी ने 14 अक्टूबर को इस मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। इससे कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से विजयन की बेटी वीणा से जुड़ी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को कथित तौर पर किए गए भुगतान के मामले में कानूनी कार्रवाई का नया पहलू जुड़ गया है।
यह घटनाक्रम केरल हाईकोर्ट में पिनराई विजयन और उनके दामाद मोहम्मद रियास को झटका लगने के बीच सामने आया है। दोनों ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें सीएमआरएल-एक्सालॉजिक लेनदेन के संबंध में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के लिए सतर्कता विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। उनकी अपील को सुप्रीम कोर्ट में डायरी नंबर आवंटित किया गया है, लेकिन तत्काल सुनवाई की मांग खारिज होने के कारण शुक्रवार को इस पर सुनवाई नहीं हुई।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुरुवार को एकल न्यायाधीश के उस आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति मांगने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश कथित लेनदेन के संबंध में ईडी की ओर से भेजे गए संचार के बाद आया था।
इस मामले में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और ईडी ने अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। एक मामले में पिनराई विजयन पहले आरोपी हैं, जबकि उनकी बेटी वीणा दूसरे आरोपी के रूप में नामजद हैं। दूसरे मामले में माकपा विधायक मोहम्मद रियास पहले आरोपी हैं और उनकी पत्नी वीणा दूसरे आरोपी के रूप में शामिल हैं।
विजयन, रियास और वीणा ने दलील दी थी कि एकल न्यायाधीश का आदेश उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करता है, क्योंकि वे मूल कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे और आदेश पारित करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने से पहले आरोपियों को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक नहीं है और ऐसा न करने से उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है, तो प्रारंभिक जांच अनिवार्य नहीं है। इस फैसले को राज्य सरकार के लिए भी झटके के तौर पर देखा गया।
ईडी के समन और सुप्रीम कोर्ट में अपील की घटनाएं हाईकोर्ट के फैसले के तुरंत बाद सामने आई हैं। ऐसे में सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है, जहां केंद्रीय एजेंसी की जांच और सतर्कता विभाग की कार्रवाई समानांतर रूप से आगे बढ़ रही हैं।
यह पहली बार है जब माकपा पोलित ब्यूरो के किसी सदस्य को ईडी ने समन भेजा है।
--आईएएनएस
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