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कर्नाटक: नकली दवाओं के रैकेट मामले में ईडी की 5 ठिकानों पर छापेमारी, बैंक खाते फ्रीज

 

बेंगलुरु, 2 नवंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और संस्थाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई।

ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, तलाशी की यह कार्रवाई पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई। मामला 18 अगस्त 2026 को बेंगलुरु दक्षिण के तवारेकेरे पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

ईडी के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत 18 अगस्त को औषधि नियंत्रण प्राधिकरण और पुलिस द्वारा सीके टांड्या गांव स्थित एक मकान पर किए गए संयुक्त छापे से हुई थी। छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास बिना वैध लाइसेंस, अनुमति या प्राधिकरण के दवाइयां और फार्मास्यूटिकल उत्पाद रखे जाने तथा उन पर लगे लेबल बदलने के सबूत मिले थे।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) और कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 63 के तहत अपराध दर्ज किए गए थे, जो पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आते हैं। इसके बाद ईडी ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच में सामने आया है कि आर. प्रशांत ने बिदादी के पास एक फार्महाउस की व्यवस्था की थी, जहां बिना अनिवार्य ड्रग लाइसेंस या अनुमति के दवाओं का निर्माण, पुनर्पैकिंग और नए लेबल लगाने का काम किया जाता था।

ईडी के अनुसार, विभिन्न राज्यों के निर्माण केंद्रों से सस्ती दवाइयां बड़ी मात्रा में खरीदी जाती थीं और उन्हें नए वायल में भरकर महंगी दवाओं के रूप में पेश किया जाता था। इन पर फाइजर की एंटीबायोटिक दवाओं जाविसेफ्टा और एम्ब्लावियो के नकली लेबल लगाए जाते थे। हालांकि वायल में सामान्य (जेनेरिक) दवाइयां होती थीं, लेकिन उन पर फाइजर ब्रांड का नाम लिखा होता था।

जांच में यह भी पता चला कि इन नकली दवाओं का वितरण कथित रूप से डीएम फार्मास्यूटिकल्स के जरिए किया जाता था और बाद में इन्हें कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई किया जाता था।

इसके बाद कृपा हेल्थकेयर द्वारा इन उत्पादों को अन्य दवा कंपनियों और अस्पतालों तक असली दवाओं के साथ मिलाकर पहुंचाया जाता था, ताकि किसी को शक न हो सके।

तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने वीरेश कुमार के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया, जिनमें लगभग 9 लाख रुपए जमा थे। इसके अलावा कई डिजिटल उपकरण, रिकॉर्ड और आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी