जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की रोजाना सुनवाई की मांग, तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंची ईडी
हैदराबाद, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के अधिकार का हवाला देते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख किया है। ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में आरोपपत्रों की शीघ्र और दिन-प्रतिदिन सुनवाई कराने की मांग की है। यह जानकारी शनिवार को एक अधिकारी ने दी।
अधिकारी ने एक बयान में कहा कि ईडी द्वारा 23 सितंबर को उच्च न्यायालय में दायर याचिका में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी सहित सभी आरोपियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की भी मांग की गई है। ये आरोप पत्र धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत दायर किए गए हैं।
ईडी ने उच्च न्यायालय से आपराधिक न्याय प्रणाली को कार्यवाही में उचित तेजी सुनिश्चित करने का निर्देश देने की प्रार्थना की है। ईडी ने कहा कि जगन मोहन रेड्डी मामले में कार्यवाही लगभग 10 वर्षों से लंबित है और कार्यवाही का क्रम ही मामले की कार्यवाही में उचित तेजी के अभाव को दर्शाता है।
ईडी ने आगे कहा कि न्याय के हित में, आरोपपत्रों और बरी किए गए आवेदनों की शीघ्र और प्रतिदिन सुनवाई/परीक्षण करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है।
ईडी ने बताया कि यह जांच बड़े कॉरपोरेट संस्थानों और व्यक्तियों को सरकारी लाभ पहुंचाने और जगन मोहन रेड्डी और उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियों में भारी निवेश प्राप्त करने से संबंधित है। यह निवेश आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा उनके मुख्यमंत्री रहते हुए दिए गए लाभों के बदले में किया गया था।
ईडी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर जगन मोहन रेड्डी और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
ईडी की जांच में पता चला कि ऑरोबिंदो फार्मा, हेटेरो ड्रग्स, इंदु प्रोजेक्ट्स, इंदु टेकजोन, लेपाक्षी नॉलेज हब, वैनपिक प्रोजेक्ट्स, वैनपिक पोर्ट्स, निम्मागड्डा प्रसाद, रामकी फार्मा सिटी (इंडिया) लिमिटेड, द इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड आदि जैसी कंपनियों और व्यक्तियों ने भारती सीमेंट कॉर्पोरेशन, जगती पब्लिकेशंस और जननी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियों में भारी मात्रा में शेयर खरीदकर निवेश किया था। ये कंपनियां वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनके परिवार से संबंधित हैं।
ईडी ने 2016 से 2021 के बीच हैदराबाद के नामपल्ली स्थित विशेष सीबीआई न्यायालय में वाईएस जगन मोहन रेड्डी और अन्य के खिलाफ नौ आरोप पत्र दायर किए।
ईडी ने कहा, "सभी नौ आरोप पत्रों पर संज्ञान लिया गया है और मामले डिस्चार्ज याचिकाओं की सुनवाई के लिए लंबित हैं। इन डिस्चार्ज याचिकाओं के लंबित रहने के कारण आरोप पत्र प्रारंभिक चरण में हैं और परिणामस्वरूप आगे की प्रगति में देरी हुई है।"
ईडी ने कहा कि संज्ञान लिए जाने के बाद काफी समय बीत जाने के बावजूद विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष कार्यवाही में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। विशेष न्यायालय द्वारा डिस्चार्ज याचिकाओं पर सुनवाई की गई, लेकिन पीठासीन अधिकारियों के तबादलों और अन्य कारणों से अभी तक उन पर निर्णय नहीं लिया जा सका है।
ईडी ने कहा कि मामले की गंभीरता पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आपराधिक अपील मामले (वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी बनाम सीबीआई)में टिप्पणी की थी कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी के अपराध होते हैं और इनके प्रति अलग दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि गहरी साजिशों से जुड़े और सार्वजनिक धन की भारी हानि वाले आर्थिक अपराधों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। ऐसे अपराध न केवल देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि राष्ट्र की वित्तीय सेहत के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
--आईएएनएस
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