अहमदाबाद रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में ईडी ने 129 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क कीं
अहमदाबाद, 17 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अहमदाबाद के एक रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 129.80 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर ली हैं। यह संपत्तियां रोनक रवजीभाई सोनानी, विपुलभाई गोरधनभाई गंगानी, केशव नारायण ग्रुप और अन्य लोगों से जुड़ी बताई गई हैं।
ईडी के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने 14 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया। एजेंसी ने सोमवार को जारी बयान में इसकी जानकारी दी।
ईडी के मुताबिक, यह मामला अहमदाबाद में घर खरीदने वालों और निवेशकों के साथ कथित रियल एस्टेट धोखाधड़ी से जुड़ा है।
जांच की शुरुआत अहमदाबाद के डीसीबी पुलिस स्टेशन, सैटेलाइट पुलिस स्टेशन, नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन और बोपल पुलिस स्टेशन में दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर की गई थी।
ईडी ने बताया कि रोनक सोनानी, विपुल गंगानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र भी दाखिल किए गए हैं।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने घर खरीदारों, छोटे निवेशकों, व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों को ठगा। उन्होंने अपनी रियल एस्टेट योजनाओं को वैध परियोजनाओं के रूप में प्रस्तुत किया।
आरोपियों ने फ्लैट और दुकानों को आकर्षक प्री-लॉन्च कीमतों पर बेचने का प्रस्ताव दिया। साथ ही 54 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न देने का वादा भी किया।
हालांकि, ईडी के अनुसार इन परियोजनाओं का प्रचार आवश्यक मंजूरियों जैसे नॉन-एग्रीकल्चर (एनए) अनुमति और रेरा पंजीकरण के बिना किया गया।
ईडी ने बताया कि छारोड़ी परियोजना में लगभग 250 खरीदारों और निवेशकों से धन जुटाया गया, जबकि अक्षर अनंत परियोजना में 44 से अधिक लोगों से निवेश लिया गया, लेकिन निवेशकों को न तो वादा किए गए फ्लैट और दुकानें मिलीं और न ही उनकी जमा राशि वापस की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से पहले निवेशकों को झूठे वादों के जरिए आकर्षित किया, फिर उनसे पैसा लिया, धन को दूसरी जगह स्थानांतरित किया और बाद में उस धन से खरीदी गई संपत्तियों को छिपाने का प्रयास किया।
ईडी के अनुसार, छारोड़ी परियोजना में खरीदारों को बताया गया था कि रेरा पंजीकरण और एनए अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। बाद में परियोजना की जमीन केवल महेंद्रभाई पटेल, आशीष विष्णुभाई पटेल और अन्य लोगों को बेच या ट्रांसफर कर दी गई, जिससे खरीदारों को नुकसान हुआ।
इसी तरह, शेला स्थित अक्षर अनंत परियोजना में समझौता ज्ञापन (एमओयू) और अन्य दस्तावेज जारी कर परियोजना को वास्तविक दिखाया गया। बाद में परियोजना बंद कर दी गई और जमीन पुरव रमेशचंद्र पटेल, दिप्रजवीरसिंह विक्रमसिंह झाला, महेंद्रसिंह प्रद्युमनसिंह चुडासमा सहित अन्य लोगों को ट्रांसफर कर दी गई।
ईडी ने यह भी पाया कि आरोपियों ने वास्तविक भुगतान के बिना फर्जी बिक्री दस्तावेजों के जरिए संपत्तियां तीसरे पक्ष के नाम स्थानांतरित कीं। जांच एजेंसी के मुताबिक, लेनदेन को वैध दिखाने के लिए पंजीकृत दस्तावेजों में काल्पनिक भुगतान का विवरण भी दर्ज किया गया।
--आईएएनएस
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