फॉर्म 6 को लेकर चुनाव आयोग के विरोधाभासी दावों की जांच की जानी चाहिए: उदित राज
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता उदित राज ने मंगलवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के उन दावों पर सवाल उठाए, जो मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं करता है, तो उसकी विश्वसनीयता, निष्पक्षता और ईमानदारी दांव पर लग जाएगी। कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी।
उदित राज ने आईएएनएस से बातचीत में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 'फॉर्म 6' में बदलाव को लेकर विरोधाभासी बयान दिए हैं। उन्होंने तीनों चुनाव आयुक्तों को तुरंत निलंबित करने की मांग की।
उन्होंने कहा, "अगर आज सुनवाई होती है, तो यह सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और ईमानदारी का सवाल होगा। चुनाव आयोग ने पहले दावा किया था कि 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों पर सुप्रीम कोर्ट की सहमति थी, लेकिन कोर्ट ने बाद में इससे इनकार कर दिया। वहीं, कल चुनाव आयोग ने जो हलफनामा दायर किया, उसमें कहा गया कि 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये दोनों बयान एक-दूसरे के विपरीत हैं।"
राज ने तर्क दिया कि ये दोनों बयान पहले से ही कोर्ट के सामने हैं, इसलिए इस मामले की जांच के लिए किसी और सबूत की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति में, तीनों चुनाव आयुक्तों को तुरंत निलंबित कर दिया जाना चाहिए। भले ही हम यह मान लें कि तीनों आयुक्तों के बीच कोई मतभेद नहीं था और फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था, फिर भी यह किसी गैरकानूनी काम को सही नहीं ठहराता। क्या आप किसी की हत्या सिर्फ इसलिए कर सकते हैं क्योंकि सब लोग सहमत हैं? या क्या आप कानून के खिलाफ काम कर सकते हैं? 'फॉर्म 6' में बदलाव करने का अधिकार संसद के पास है। इसलिए, भले ही तीनों आयुक्त एकमत रहे हों, फिर भी यह कोई बचाव नहीं हो सकता। चुनाव आयोग का झूठ पकड़ा गया है।"
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "आज हम देखेंगे कि सुप्रीम कोर्ट के जजों के पास कितनी ताकत है, वे कितने ईमानदार हैं और क्या वे कोई सख्त कदम उठाते हैं। चुनाव आयोग अब एक मुश्किल स्थिति में है।"
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती दी गई है, उनके खिलाफ विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच की मांग की गई है और मतदाता सूची के राष्ट्रव्यापी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजीआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ करेगी, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल होंगे।
--आईएएनएस
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