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जयशंकर और वियतनाम के विदेश मंत्री ने मेड-इन-इंडिया रक्षा सामग्री की आपूर्ति बढ़ाने पर की चर्चा

 

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके वियतनामी समकक्ष ले होआई ट्रुंग ने सोमवार को राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ मेड-इन-इंडिया रक्षा सामग्री की आपूर्ति बढ़ाने पर चर्चा की।

दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग की 19वीं बैठक (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता करते हुए द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा की।

बैठक को उत्पादक और परिणामोन्मुखी बताते हुए जयशंकर ने ‘एक्स’ पर कहा कि वार्ता में राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने, मेड-इन-इंडिया रक्षा सामग्री की आपूर्ति बढ़ाने तथा व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने समुद्री और कृषि उत्पादों तथा दवाओं के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने, ऊर्जा सहयोग को गहरा करने और विरासत संरक्षण एवं सांस्कृतिक परियोजनाओं को बढ़ावा देने के मुद्दों पर भी चर्चा की।

जयशंकर ने कहा कि वियतनाम भारत की लुक ईस्ट, आसियान, हिंद-प्रशांत, महासागर और ग्लोबल साउथ से जुड़ी नीतियों का एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने कहा कि वियतनाम भारत की क्षेत्रीय भागीदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने विशेष रूप से भारत की एक्ट ईस्ट नीति, महासागर दृष्टिकोण और व्यापक हिंद-प्रशांत विजन में वियतनाम की भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने आसियान के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में भी वियतनाम के महत्व पर जोर दिया।

जयशंकर ने कहा कि भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग की 19वीं बैठक दोनों देशों के बीच पहले किए गए समझौतों के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और शीर्ष स्तर पर बनी राजनीतिक गति को दोनों देशों के लोगों के लिए ठोस और प्रत्यक्ष परिणामों में बदलने का महत्वपूर्ण अवसर है।

वहीं, वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग ने नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा उद्देश्यों में योगदान देने की ब्रिक्स की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित किया है।

ट्रुंग ने कहा कि भारत की भूमिका और प्रयासों के कारण शिखर सम्मेलन सफल रहा और इसमें बेहद महत्वपूर्ण घोषणा-पत्र जारी किया गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में यह घोषणा-पत्र प्रासंगिक है और इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून के महत्वपूर्ण सिद्धांतों तथा शांति, सुरक्षा और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की पुष्टि की गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि सम्मेलन में सार्थक चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण पहल सामने रखी गईं।

इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में अपने वियतनामी समकक्ष ले मिन्ह हंग से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की थी।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर विजन का प्रमुख स्तंभ बना रहेगा।

--आईएएनएस

डीएससी