भारत और चीन के बीच व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित करना आवश्यक: एस जयशंकर
मनीला, 22 जुलाई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक में कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के मतभेदों को कूटनीति और संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया, ताकि वे विवाद का रूप न लें।
मनीला में बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक में जयशंकर ने निष्पक्ष बाजार तक पहुंच और व्यापार संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।
आसियान से जुड़ी बैठकों के इतर हुई इस वार्ता में जयशंकर ने कहा, "कजान में अक्टूबर 2024 में हमारे नेताओं की बैठक के बाद भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। पिछले अगस्त में तियानजिन में हुई उनकी मुलाकात ने इस दिशा को और मजबूत किया।"
उन्होंने कहा, " भारत का मानना है कि स्थिर और सहयोगात्मक संबंध आपसी सम्मान, साझा हितों और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के आधार पर विकसित किए जा सकते हैं। ऐसे संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।"
जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को "पूर्वशर्त" बताया। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं और इस पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों की स्पष्ट रूप से पूर्वशर्त है। इस क्षेत्र से जुड़े तंत्रों को पूरा समर्थन और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।"
दो बड़े देशों और पड़ोसी होने के नाते भारत और चीन के निहित हितों पर भी विदेश मंत्री ने खुलकर राय रखी। उन्होंने कहा, "यही वजह है हमारे नेताओं ने सहमति जताई थी कि मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए। उन्हें उचित तरीके से संभालना कूटनीति की जिम्मेदारी है।"
विदेश मंत्री ने भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए हाल के महीनों में उठाए गए कदमों का स्वागत किया। उन्होंने प्रत्यक्ष उड़ानों की बहाली, वीजा व्यवस्था में सुधार, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर शुरू करने और सीमा व्यापार की बहाली का उल्लेख किया।
हालांकि, उन्होंने कहा, "संबंधों में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी ध्यान देने की जरूरत है। इनमें निष्पक्ष बाजार तक पहुंच, व्यापार संतुलन और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता प्रमुख हैं।"
जयशंकर ने कहा कि सरकारी स्तर और लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाना भी जरूरी है। साथ ही, दोनों देशों को अपनी आपसी प्राथमिकताओं के अनुसार विभिन्न तंत्रों और मंचों की बैठकों पर सहमति बनानी होगी।
विदेश मंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन द्वारा विभिन्न गतिविधियों और पहलों में दिए गए सहयोग की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, "मौजूदा वैश्विक स्थिति बेहद जटिल है और ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना जरूरी है।"
--आईएएनएस
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