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एस जयशंकर ने ओमान के विदेश मंत्री अलबुसैदी से पश्चिम एशिया संघर्ष पर की चर्चा

 

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चर्चा की।

बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने ओमान के विदेश मंत्री से पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर बातचीत की।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 मार्च को ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से फोन पर वार्ता की थी। उन्होंने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा की और ओमान द्वारा भारतीय समुदाय को दिए जा रहे सहयोग की सराहना की।

पीएम मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर विचार साझा किए और इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।

ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने 2 मार्च को बताया कि तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जहाज पर मौजूद भारतीयों को सुरक्षित और जल्द भारत वापस भेजने की कोशिश कर रहा है।

ओमान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह तेल टैंकर ओमान के तट से लगभग 52 समुद्री मील दूर एक मानवरहित सतही पोत द्वारा निशाना बनाया गया।

टैंकर में करीब 59,463 मीट्रिक टन कार्गो था। हमले के बाद इंजन रूम में आग और विस्फोट हुआ, जिसमें भारतीय चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई।

बचाव अभियान के दौरान जहाज पर मौजूद चालक दल के 21 सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 16 भारतीय, 4 बांग्लादेशी और 1 यूक्रेनी नागरिक थे। साथ ही रॉयल नेवी ऑफ ओमान का एक जहाज टैंकर की स्थिति पर नजर रख रहा है और आसपास से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दे रहा है।

पश्चिम एशिया में यह तनाव 28 फरवरी को यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ, जिनका उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य ढांचे को कमजोर करना था।

इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेताओं में से एक सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले कर अमेरिकी ठिकानों, क्षेत्रीय राजधानियों और सहयोगी सेनाओं को निशाना बनाया, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी