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एस. जयशंकर ने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा से की मुलाकात, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक सप्लाई चेन पर चर्चा

 

पेरिस, 27 मार्च (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को फ्रांस में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा से मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने पश्चिम एशिया के हालात, क्षेत्रीय स्थिरता के महत्व और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के सुरक्षित संचालन पर चर्चा की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में अपनी साझा रुचि की भी पुष्टि की।

बैठक के बाद सिबिहा ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट करते हुए कहा, “फ्रांस में जी7 मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस. जयशंकर के साथ विचारों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ। हमने मध्य पूर्व की स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता के महत्व और प्रमुख वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के सुरक्षित संचालन पर चर्चा की।”

उन्होंने कहा, “हमने आगे के संपर्कों का समन्वय भी किया और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने में अपनी पारस्परिक रुचि की पुष्टि की।”

दोनों मंत्रियों की यह मुलाकात पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हुई है, जो 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ था। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत हुई थी।

इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों, क्षेत्रीय राजधानियों और सहयोगी बलों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर फ्रांस में हैं।

वैश्विक शासन में सुधार पर आयोजित सत्र में अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार, शांति स्थापना अभियानों को सुव्यवस्थित करने और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर लिखा, “जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में आमंत्रित भागीदारों के साथ वैश्विक शासन सुधार पर सत्र में भाग लिया। यूएनएससी सुधार की तात्कालिक आवश्यकता, शांति अभियानों के सरलीकरण और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर प्रकाश डाला। साथ ही वैश्विक दक्षिण की ऊर्जा चुनौतियों, उर्वरक आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को विशेष रूप से उठाया।”

दूसरे सत्र में जयशंकर ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से यह स्पष्ट होता है कि मजबूत व्यापार मार्गों और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता और बढ़ गई है।

उन्होंने लिखा, “जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे सत्र में आईएमईसी पर अपने विचार साझा किए। पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितताएं अधिक मजबूत व्यापार गलियारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता को और भी स्पष्ट करती हैं।”

उन्होंने कहा, “यूरोपीय संघ, ईएफटीए सदस्य देशों और यूके के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौतों ने आईएमईसी की उपयोगिता को बढ़ाया है। इस महत्वपूर्ण संपर्क पहल को साकार करने के लिए व्यापक समर्थन और उत्साह सराहनीय है।”

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम