डंकी रूट मामला, ईडी ने दिल्ली के टिकट एजेंट को किया गिरफ्तार
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के एक टिकट एजेंट को गिरफ्तार किया है। यह एजेंट मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल था, जिसका संबंध अमेरिका से वापस भेजे गए उन भारतीयों से है, जो स्थानीय तस्करों और माफिया की मदद से खतरनाक रास्तों से कई दक्षिण/मध्य अमेरिकी देशों की सीमाएं अवैध रूप से पार करके गए थे। इस मामले को 'डंकी रूट केस' के नाम से भी जाना जाता है।
ईडी की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि ईडी के जालंधर जोनल ऑफिस ने 23 अक्टूबर को टिकट एजेंट तरुण खोसला को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई 'डंकी रूट केस' के सिलसिले में की गई है, जो फरवरी 2025 में अमेरिका से डिपोर्ट किए गए भारतीयों से जुड़ा है।बयान के अनुसार, खोसला को एक विशेष पीएमएलए कोर्ट द्वारा 30 अक्टूबर तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया गया है।
ईडी के अनुसार, जांच में पता चला है कि खोसला 'डंकी रूट' नेटवर्क का एक मुख्य सूत्रधार था। वह पंजाब और हरियाणा के कई एजेंटों के साथ मिलकर काम करता था। ये एजेंट अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों से पासपोर्ट और पैसे इकट्ठा करते थे और उन्हें दिल्ली में खोसला को सौंप देते थे।
ईडी ने बताया कि इसके बाद, खोसला दक्षिण अमेरिका के देशों - जैसे गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल साल्वाडोर के लिए वीजा और हवाई टिकट का इंतजाम करता था। इसके साथ ही वह इन लोगों को अवैध और खतरनाक रास्तों से अमेरिका की सीमा तक पहुंचाने में मदद करता था। वह 'डंकी रूट' से जाने वाले हर व्यक्ति के लिए रास्ता तय करने और कीमत तय करने में मुख्य भूमिका निभाता था।
ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। ये मामले बीएनएस, 2023 और 'इमिग्रेशन एक्ट', 1983 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे। यह कार्रवाई तब हुई जब 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को मैक्सिको सीमा के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका में घुसने के कारण वहां से डिपोर्ट कर दिया गया।
ईडी की जांच से पता चला है कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को एजेंटों और बिचौलियों ने यह झूठा वादा देकर फंसाया था कि उन्हें कानूनी तरीके से अमेरिका भेजा जाएगा, लेकिन इसके बजाय उनसे 30 लाख से 60 लाख रुपए तक की रकम लेकर उन्हें 'डंकी रूट' के जरिए भेज दिया गया।
ईडी ने बताया कि इससे पहले, इस मामले में 9 जुलाई 2025 और 11 जुलाई 2025 को 19 जगहों पर तलाशी ली गई थी। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री बरामद की गई, जिसमें निकारागुआ और इथियोपिया के फर्जी इमिग्रेशन स्टैम्प और वीजा स्टैम्प भी शामिल थे।
15 दिसंबर को ईडी ने 5.41 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया था। इनमें कृषि भूमि, आवासीय और व्यावसायिक परिसर एवं बैंक खातों में जमा रकम शामिल है। ये संपत्तियां उन एजेंटों द्वारा अपराध से कमाई गई रकम से बनाई गई थीं, जो लोगों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजने के काम में शामिल थे।
इसके बाद, 18 दिसंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को ईडी ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई जगहों पर तलाशी ली। इस दौरान तरुण खोसला के ठिकानों से 4.62 करोड़ रुपए नकद, लगभग 5.9 किलोग्राम सोना (बार और सिक्के) और लगभग 313 किलोग्राम चांदी (बार) जब्त की गई। इनकी कुल कीमत 19.14 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, वहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए।
ईडी ने बताया कि अन्य जगहों से 50 से ज्यादा लोगों के असली पासपोर्ट, डायरियां, लेन-देन के रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए हैं।
ईडी के अनुसार, जांच में पता चला है कि खोसला 'डंकी रूट' नेटवर्क में एक मुख्य व्यक्ति था। उसके मोबाइल फोन से मिले डेटा और आपत्तिजनक चैट से पता चलता है कि वह एक 'इमिग्रेशन-क्लियरेंस फिक्सर' के तौर पर काम करता था।
एक अंतरराष्ट्रीय संपर्क के साथ उसकी चैट से पता चलता है कि वह विदेशी हवाई अड्डों पर भी समन्वय करता था। इसमें इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए पैसे इकट्ठा करना, टिकट की व्यवस्था करना, यात्रियों को संभालना और डॉलर में भुगतान लेना शामिल था।
ईडी ने कहा, "'ओके टू बोर्ड' जैसे निर्देश देना और एयरलाइन या इमिग्रेशन कर्मचारियों के साथ तालमेल बिठाना, यह साबित करता है कि यात्रा की व्यवस्थाओं पर उसका पूरा नियंत्रण था।"
जांच से यह भी पता चला है कि खोसला लोगों को अवैध 'डंकी रूट' के जरिए अमेरिका भेजने की व्यवस्था करता था। उसने दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए वीजा क्लीयरेंस का इंतजाम किया, जिसमें जाली 'येलो फीवर' टीकाकरण प्रमाण-पत्र बनवाना, टिकट बुक करना और 'डोंकर्स' के साथ तालमेल बिठाना शामिल था।
ईडी के अनुसार, उसने मेक्सिको में 'माइक', ब्राजील में 'अली' और मेक्सिको में ही एक अन्य संपर्क 'क्रिस्टी' जैसे विदेशी 'डोंकर्स' से बातचीत की थी। ये लोग 'डंकी रूट' के जरिए लोगों को सीमा पार कराने और उससे जुड़े भुगतान का काम संभालते थे।
ईडी ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान, उसकी प्रोप्राइटरशिप फर्म 'बीजे इंटरनेशनल' के बैंक खाते में 414 नकद-क्रेडिट लेन-देन के जरिए कुल 30.38 करोड़ रुपए जमा किए गए थे।
--आईएएनएस
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