भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कुशल प्रतिभाओं की जरूरत: डॉ. प्रीति अदाणी
अहमदाबाद, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। अदाणी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच अधिक गहरे सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि देश के सेमीकंडक्टर मिशन को सफल बनाने के लिए केवल अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ऐसी कुशल प्रतिभाओं की भी जरूरत है जो जटिल तकनीकों को डिजाइन, विकसित और बेहतर बना सकें।
अदाणी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित "कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (सीएचआईपीएस) 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. अदाणी ने कहा, "हमारी तकनीकी प्रगति का वास्तविक पैमाना यह नहीं होगा कि मशीनें कितनी बुद्धिमान बनती हैं, बल्कि यह होगा कि हम मानव बुद्धिमत्ता का कितना विवेकपूर्ण उपयोग कर बेहतर भविष्य का निर्माण करते हैं।"
अदाणी यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस, सिरिल अमरचंद मंगलदास और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने वायरलेस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर डिजाइन, मेमोरी एवं स्टोरेज, पावर सिस्टम्स और कानूनी ढांचे सहित सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में उभर रहे अवसरों और चुनौतियों पर विचार साझा किए।
सम्मेलन के दौरान तीन प्रमुख पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें "द फ्यूचर ऑफ सेमीकंडक्टर डिजाइन इन इंडिया" में देश की डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई। वहीं, "सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग: शेपिंग इंडिया्स टेक्नोलॉजिकल फ्यूचर" सत्र में विनिर्माण की भूमिका और भारत के तकनीकी भविष्य पर उसके प्रभाव का विश्लेषण किया गया। जबकि "कैरियर ऑपर्च्युनिटीज इन द सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम" सत्र रोजगार के अवसरों, आवश्यक कौशल और भविष्य के करियर मार्गों पर फोकस रहा।
यह सम्मेलन आईआईटी मंडी, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन, सेमीकंडक्टर कंपनियों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चाओं का केंद्र बिंदु शोध, तकनीकी शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना रहा।
भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा केवल फैब्रिकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग में वैश्विक विशेषज्ञता विकसित करने पर भी आधारित है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) ने इस दिशा में गति प्रदान की है, जबकि गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएं राज्य को इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बना रही हैं।
सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से विस्तार के कारण उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और विश्वसनीय ऊर्जा अवसंरचना की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सेमीकंडक्टर क्षेत्र का महत्व और भी बढ़ जाता है।
अदाणी यूनिवर्सिटी ने घोषणा की कि अहमदाबाद में प्रस्तावित अपने बहुविषयक वैश्विक परिसर में वह सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता विकसित करेगी। इसके तहत युवा इंजीनियरों के लिए विशेष कार्यक्रम, उद्योग पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों के क्षमता विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने की योजना है।
इसके पीछे विश्वविद्यालय का उद्देश्य अकादमिक शिक्षा और शोध को सीधे उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना होगा, ताकि भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए भविष्य की प्रतिभा तैयार की जा सके।
--आईएएनएस
डीबीपी