तेहरान पर नए हमलों के बाद राष्ट्रपति ट्रंप बोले-'पता नहीं ईरान समझौते का सम्मान करेगा या नहीं'
वॉशिंगटन, 9 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के नए जवाबी हमलों के बाद ईरान बातचीत करना चाहता है। ट्रंप ने सवाल किया कि क्या तेहरान पर किसी भी समझौते का सम्मान करने के लिए भरोसा किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि वाशिंगटन ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने पर ध्यान देते हुए जोरदार जवाब देना जारी रखेगा।
ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समय) को कहा, "हमने और भी जोर से जवाब दिया।"
तुर्किए में नाटो समिट के बाद वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने जवाब दिया था।
ट्रंप ने कहा, "हमने उन पर बहुत कड़ा जवाबी हमला किया। मैं कहता हूं कि अनुपात 20-1 का रहा। वे हर बार हम पर हमला करेंगे, तो हम 20 गुना ज्यादा ताकत से जवाब देंगे। हमने बीती रात भी ऐसा ही किया। आज भी हमने कुछ कार्रवाई की, लेकिन वह मुख्य रूप से पिछली रात के जवाब में थी। उन्होंने वास्तव में दो नहीं, बल्कि तीन जहाजों पर हमला किया था। जब उन्होंने हमला किया, तो हमने उससे कहीं अधिक जोरदार जवाब दिया।"
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मुझे नहीं पता कि वे डील मानेंगे या नहीं; यही समस्या है।"
जब ट्रंप से पूछा गया कि यदि ईरान समझौता करना चाहता है, तो वह वाणिज्यिक जहाजों पर हमला क्यों करेगा, तो उन्होंने कहा, "सच कहूं तो यह सामान्य बात नहीं है। हालात इतने असामान्य हैं कि वे कुछ हद तक नियंत्रण से बाहर हो गए हैं, लेकिन वे समझौता करने के लिए बेताब हैं।"
ट्रंप ने कहा कि यह पूरा टकराव ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा, "यह ईरान का डी-न्यूक्लियराइजेशन था, इसलिए, यह सब परमाणु हथियार लेने, ईरान को न्यूक्लियर हथियार न बनाने देने के बारे में है। और यह सबको पसंद आना चाहिए, आपको भी।"
ट्रंप ने उन बातों को भी खारिज कर दिया कि तुर्किए छोड़ने से पहले आखिरी समय में एयरक्राफ्ट बदलना किसी खास सुरक्षा चिंता की वजह से हुआ था। उन्होंने कहा कि यह बदलाव इसलिए किया गया ताकि एयर बेस पर मौजूद लोग प्लेन देख सकें।
यह पूछे जाने पर कि क्या एयर फोर्स वन के खिलाफ ईरान से कोई भरोसेमंद खतरा था, ट्रंप ने कहा, "उनकी लिस्ट में मैं हर समय नंबर वन पर रहता हूं।"
ट्रंप ने नाटो समिट को सफल बताया और कहा कि रक्षा खर्च को लेकर पहले के तनाव के बाद गठबंध ने एकता दिखाई है। उन्होंने कहा, "यह बहुत, बहुत अच्छी मीटिंग थी और लोग समझते हैं कि अमेरिका के साथ बहुत गलत व्यवहार किया गया है। मीटिंग में बहुत सी बातें सुलझ गईं।"
उन्होंने कहा कि यूरोप में अमेरिकी सैनिकों के भविष्य के फैसले कुछ हद तक ग्रीनलैंड और ईरान से जुड़े विकास पर निर्भर करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन सहयोगी देशों ने पहले मदद करने से मना कर दिया था, वे अब ईरान पर मदद करने के लिए उत्सुक हैं।
ट्रंप ने कहा, "वे सब जाना चाहते हैं और वे ईरान के मामले में बहुत मदद करना चाहते हैं, लेकिन मुझे सच में मदद की जरूरत नहीं है।" इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीरिया और हिज्बुल्लाह पर चर्चा की।
ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति से जब पूछा गया कि क्या अल-शरा ने लेबनान में हिज्बुल्लाह कतो लेकर कोई वादा किया है तो ट्रंप ने जवाब दिया, "हां।" हालांकि, उन्होंने इस संबंध में किसी भी तरह की विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की उनकी मीटिंग के दौरान बहुत अच्छे थे।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच मिलिट्री एक्सचेंज और कमर्शियल शिपिंग पर हमलों के बाद तनाव बढ़ गए हैं। इस बीच ट्रंप सरकार ने कहा है कि अमेरिका का मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के साथ ही सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करके तेहरान को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर करना है।
--आईएएनएस
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