डीएमके ने तमिलनाडु कैबिनेट की बैठकों में निजी व्यक्तियों के कथित प्रवेश को लेकर एफआईआर की मांग की
चेन्नई, 1 जुलाई (आईएएनएस)। द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (डीएमके) ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दो कथित करीबी सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से कैबिनेट बैठकों और अन्य गोपनीय सरकारी विचार-विमर्श में उनकी कथित भागीदारी के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने और जांच शुरू करने का आग्रह किया है।
डीजीपी को सौंपी गई शिकायत में, डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती ने आरोप लगाया है कि दो निजी व्यक्ति, जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी, सरकार में कोई आधिकारिक पद न होने के बावजूद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठकों, आधिकारिक समीक्षा बैठकों और अन्य उच्च स्तरीय चर्चाओं में शामिल हुए थे।
आरोपों को संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए भारती ने एफआईआर दर्ज करने और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और अन्य लागू कानूनों के तहत कथित अपराधों की व्यापक जांच की मांग की।
शिकायत में कहा गया कि यहां दी गई जानकारी से प्रथम दृष्टया अनधिकृत निजी व्यक्तियों द्वारा गोपनीय सरकारी सूचनाओं का अवैध संचार, प्राप्ति और उपयोग, साथ ही सार्वजनिक पद का संभावित दुरुपयोग, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य अपराध प्रकट होते हैं, जिनकी तत्काल आपराधिक जांच आवश्यक है।
भारती ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 164(3) और तीसरी अनुसूची के तहत निर्धारित पद और गोपनीयता की शपथ के कारण मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल की कार्यवाही और अन्य संवेदनशील सरकारी कार्यों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए निरंतर कानूनी रूप से बाध्य हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो वे संवैधानिक दायित्वों, वैधानिक कर्तव्यों और आपराधिक कानून का उल्लंघन होंगे, जिसके लिए तत्काल पुलिस हस्तक्षेप आवश्यक है।
शिकायत के अनुसार, डीएमके द्वारा मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी और आंध्र प्रदेश निवासी बताए गए अरोकियासामी और रेड्डी कथित तौर पर राज्य सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठकों, आधिकारिक समीक्षा सत्रों और अन्य गोपनीय विचार-विमर्शों के दौरान उपस्थित थे।
डीएमके ने पुलिस से आग्रह किया कि वह इस बात की गहन जांच करे कि दोनों व्यक्तियों को अत्यंत गोपनीय सरकारी बैठकों में प्रवेश कैसे मिला, क्या उनके साथ कोई गोपनीय जानकारी साझा की गई थी, और क्या सरकारी कर्मचारियों ने स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए उनकी भागीदारी को सुगम बनाया था।
--आईएएनएस
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