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तमिलनाडु: डीएमके-एआईएडीएमके के टकराव की वजह से चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल की बैठक में रुकावट

 

चेन्नई, 24 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में नई सरकार बनने के बाद ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) काउंसिल की पहली बैठक में बुधवार को हंगामेदार दृश्य देखने को मिले। डीएमके और एआईएडीएमके पार्षदों के बीच तीखी बहस के बाद टकराव की स्थिति बन गई, जिससे रिपन बिल्डिंग में बैठक की कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित हुई।

कॉर्पोरेशन कमिश्नर जीएस समीरन और डिप्टी मेयर एम. महेश कुमार की मौजूदगी में मेयर आर. प्रिया की अध्यक्षता में हुई यह बैठक कड़ी सुरक्षा और राजनीतिक सरगर्मी के बीच आयोजित की गई थी। व्यवस्था बनाए रखने के लिए कॉर्पोरेशन मुख्यालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

शुरुआत में ध्यान काउंसिल हॉल के अंदर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की तस्वीरों के प्रदर्शन पर केंद्रित रहा। सत्र के दौरान मौजूदा टीवीके-नीत सरकार और पिछली डीएमके सरकार, दोनों की तस्वीरों का वहां होना चर्चा का विषय बन गया।

बैठक के दौरान कई नागरिक और प्रशासनिक मुद्दे उठाए गए। मनाली जोनल कमेटी के चेयरमैन एवी अरुमुगम ने कॉरपोरेशन से आग्रह किया कि वह थंडुवाडी में खाली पड़ी नागरिक जमीन को वापस पाने के लिए एक प्रस्ताव पारित करे; यह जमीन पहले चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) को लॉरी पार्किंग सुविधा के इस्तेमाल के लिए सौंपी गई थी।

डीएमके पार्षद चित्ररासु और अन्य सदस्यों ने भी मौजूदा सरकारी आदेश का हवाला देते हुए जोनल कमेटी की बैठक वाले हॉल में एमके स्टालिन की तस्वीरें लगाने की मांग की।

इस बीच, एआईएडीएमके के फ्लोर लीडर सतीश कुमार ने अपने वार्ड के रिहायशी इलाके 'वर्मा कॉलोनी' में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया, जहां लगभग 2,000 लोग रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में वोटर होने के बावजूद इस इलाके को नजरअंदाज किया गया है और यहां कोई खास विकास कार्य नहीं हुआ है।

इन चिंताओं के जवाब में मेयर प्रिया ने बताया कि यह इलाका अतिक्रमण वाले जोन में आता है, जिससे कॉर्पोरेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने काउंसिल को भरोसा दिलाया कि अधिकारी इलाके का मुआयना करेंगे और रिपोर्ट सौंपेंगे।

तनाव तब बढ़ गया जब जोनल कमेटी के चेयरमैन रविचंद्रन ने इस मुद्दे पर बोलने की कोशिश की। खबरों के मुताबिक, सतीश कुमार ने उनसे अपनी सीट पर बैठे रहने को कहा, जिस पर डीएमके पार्षद कवि गणेशन ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते बहस तेज हो गई और दोनों पक्षों के पार्षद इसमें शामिल हो गए।

इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए मेयर प्रिया ने कहा कि जहां जोनल समिति के अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की देखरेख करते हैं, वहीं विधायक भी जोनल बैठकों में भाग लेने, निर्वाचन क्षेत्र की परियोजनाओं पर चर्चा करने और समिति के अध्यक्षों के साथ मंच साझा करने के हकदार हैं।

हंगामे के बावजूद, परिषद ने अपना एजेंडा पूरा किया और सदन के समक्ष रखे गए सभी 38 प्रस्तावों को मंजूरी दी।

--आईएएनएस

एमएस/