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साइबर ठगी के लिए कार में चला रहे थे मोबाइल कॉल सेंटर, दिल्ली पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार

 

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने एक ठगी नेटवर्क से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए एक चलती हुई कार के अंदर 'मोबाइल कॉल सेंटर' चला रहे थे। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान ओल्ड कोंडली निवासी लोकेश तोमर (37), शाहदरा निवासी तुषार (35) और कल्याण पुरी निवासी हिमांशु राठौर के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, यह मामला मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले नीलेश विश्वकर्मा की शिकायत पर सामने आया। नीलेश के साथ 65,000 रुपये की ठगी हुई थी। ठगों ने उन्हें बीमा पॉलिसियों में निवेश किए गए 45 लाख रुपये वापस दिलाने के नाम पर 'प्रोसेसिंग फीस' के तौर पर यह रकम ली थी। शिकायत मिलने के बाद पूर्वी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिलने के बाद हिमांशु राठौर से जुड़े इंडियन ओवरसीज बैंक खाते पर संदेह हुआ। आगे की जांच से नेटवर्क के अन्य संदिग्ध सदस्यों की पहचान हुई।

पुलिस ने संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन और धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे फर्जी खातों की जांच की। जांच के दौरान हिमांशु राठौर को गिरफ्तार किया गया।

हिमांशु से पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी एक सफेद कार को अपने मोबाइल ऑपरेशनल बेस के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे और पकड़े जाने से बचने के लिए अक्सर अपना स्थान बदलते रहते थे। तकनीकी विश्लेषण और फील्ड निगरानी के माध्यम से पुलिस ने वाहन का पता लगाया और पूर्वी दिल्ली के ओल्ड कोंडली इलाके में उसे रोका, जिससे अन्य दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सका।

पुलिस ने एक कार, सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड, पांच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी प्रतियां, छह चेकबुक, तीन पासबुक, एक हस्ताक्षरित चेक, दो रेंट एग्रीमेंट, 11 पासपोर्ट तस्वीरें, ग्राहकों की सूची वाले नौ पेज और एनपीसीआई नामक एक संदिग्ध जाली मुहर बरामद की।

पुलिस के अनुसार, आरोपी लोकेश तोमर पर ऑपरेशन का समन्वय करने और फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का संदेह है। तुषार ने अधिकारियों या प्रतिनिधियों का रूप धारण करके संभावित पीड़ितों से संपर्क किया और उन्हें वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) और क्रेडेंशियल सहित संवेदनशील बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया। राठौर पर कमीशन के बदले धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का संदेह है।

पुलिस मुंबई और तेलंगाना में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में आरोपियों के संभावित संबंधों के साथ-साथ संदिग्ध अंतरराज्यीय संबंधों की भी जांच कर रही है। इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करने और वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

ओपी/एएस