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दिल्ली हाई कोर्ट ने दंपत्ति के बीच समझौता होने के बाद दहेज उत्पीड़न की एफआईआर रद्द कर दी

 

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महिला के साथ क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोपी एक व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी है। यह फैसला दोनों पक्षों द्वारा वैवाहिक विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने और मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत तलाक प्राप्त करने के बाद लिया गया।

न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने मोहम्मद कासिम और अन्य द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए, 406 और 34 के तहत जामिया नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की। पीठ ने पाया कि आपराधिक कार्रवाई जारी रखने से कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि विवाद मुख्य रूप से निजी प्रकृति का था।

यह आपराधिक मामला शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता संख्या 1 के बीच 11 मार्च, 2023 को मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न विवाह से संबंधित था।

इस विवाह से कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई और दहेज की मांग को लेकर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के बाद दोनों पक्ष 28 सितंबर, 2023 से अलग रहने लगे।

एफआईआर 1 अक्टूबर, 2024 को दर्ज की गई थी और उसके बाद आईपीसी की धारा 498ए, 506, 406, 509, 354सी और 34 के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

कार्यवाही के दौरान, पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजा गया और उन्होंने दिल्ली के साकेत कोर्ट स्थित मध्यस्थता केंद्र में सौहार्दपूर्ण ढंग से अपने विवादों का निपटारा किया।

समझौते को 7 फरवरी, 2026 को लिखित रूप में दर्ज किया गया। समझौते के तहत, याचिकाकर्ता नंबर 1 और शिकायतकर्ता ने 7 मार्च, 2026 को हुए एक समझौते के माध्यम से मुस्लिम व्यक्तिगत कानूनों (खुला) के अनुसार तलाक प्राप्त किया।

याचिकाकर्ता ने समझौते के अनुसार शिकायतकर्ता को 1.50 लाख रुपए की पूरी समझौता राशि का भुगतान भी किया।

दोनों पक्ष हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित थे, और शिकायतकर्ता ने पुष्टि की कि मामला स्वेच्छा से, बिना किसी बल, भय या दबाव के सुलझा लिया गया था और उसे सामान सहित पूरी समझौता राशि प्राप्त हो गई थी।

उसने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध एफआईआर रद्द किए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।

न्यायमूर्ति दुदेजा ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को देखते हुए आपराधिक कार्रवाई जारी रखने का कोई लाभ नहीं होगा, विशेषकर तब जब विवाद में कोई जनहित शामिल न हो और यह मुख्य रूप से निजी प्रकृति का हो।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने न्याय के हित में एफआईआर को रद्द करना उचित समझा।

तदनुसार, दिल्ली कोर्ट ने जामिया नगर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 498ए, 406 और 34 के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 362/2024 और उससे संबंधित सभी कार्रवाई को रद्द कर दिया और याचिका को स्वीकार कर लिया।

--आईएएनएस

एमएस/