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यमुना पर खर्च और सीएजी रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज करेगी दिल्ली सरकार: प्रवेश वर्मा

 

अहमदाबाद, 17 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार यमुना की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं और दिल्ली जल बोर्ड के खर्च से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट की जांच के बाद एफआईआर दर्ज करेगी। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने सोमवार को यह जानकारी दी।

प्रवेश वर्मा अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट के दौरे पर थे, जहां उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रिवरफ्रंट के विकास और नदी में सीवेज जाने से रोकने की व्यवस्था का निरीक्षण किया।

उन्होंने कहा कि सीएजी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खर्च किए गए धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मंत्री ने कहा, "पिछली सरकारों ने जो भी काम किए, उन सभी पर सीएजी रिपोर्ट आ रही हैं। दिल्ली जल बोर्ड पर भी सीएजी की रिपोर्ट आई है, जिसमें उसके खर्च किए गए धन की समीक्षा की गई है।"

उन्होंने आगे कहा, "सीएजी ने गंभीर सवाल उठाए हैं कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर पैसा खर्च किया गया, लेकिन वे कभी ठीक से नहीं चले और अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पाए। वे उतने पानी और सीवेज का उपचार नहीं कर सके, जितना करना चाहिए था, इसलिए सीएजी ने गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। हमने रिपोर्ट समिति को भेज दी है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।"

सीएजी की यह परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 2017-18 से 2021-22 की अवधि में दिल्ली जल बोर्ड के कामकाज से संबंधित है।

रिपोर्ट में सीवर प्रबंधन की कमियां, परियोजनाओं में देरी, वित्तीय प्रबंधन और मानव संसाधन संबंधी खामियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अनधिकृत कॉलोनियों से निकलने वाला बिना उपचारित सीवेज सीधे नालों में छोड़ा जा रहा था और कई एसटीपी से छोड़ा जाने वाला उपचारित पानी भी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था।

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, 1,080 अनधिकृत कॉलोनियों से निकलने वाले 212.59 एमजीडी सीवेज को बिना उपचार के नालों में छोड़ा जा रहा था। वहीं, यमुना में छोड़े जा रहे 25 एसटीपी के ट्रीटेड इफ्लुएंट भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली सरकार यमुना की सफाई पूरी होने का इंतजार नहीं कर रही है, बल्कि नदी की सफाई और रिवरफ्रंट विकास का काम एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "यमुना की सफाई को लेकर विभिन्न विभागों ने एक साथ काम शुरू कर दिया है।"

मंत्री के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड नए एसटीपी बना रहा है और पुराने संयंत्रों को अपग्रेड कर रहा है। सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता की कमी को पूरा करना है।

उन्होंने बताया कि अगले 18 महीनों में लाखों घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। साथ ही डेयरियों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण और सेप्टिक टैंकों के अपशिष्ट को एसटीपी तक पहुंचाकर उपचारित करने की योजना भी तैयार की जा रही है।

हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन करीब 3,596 मिलियन लीटर सीवेज पैदा होता है, जबकि 37 संचालित एसटीपी की कुल क्षमता 3,474 एमएलडी है।

इसके बावजूद करीब 641 एमएलडी सीवेज बिना उपचार के नदी और नालों में पहुंच रहा है। साथ ही 14 एसटीपी प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि साबरमती रिवरफ्रंट से कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं, जिन्हें यमुना परियोजना में लागू किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, "साबरमती के सामने जो लगभग 90 प्रतिशत समस्याएं थीं, वही समस्याएं यमुना में भी हैं। बाकी चुनौतियां इसलिए बड़ी हैं क्योंकि दिल्ली की आबादी ज्यादा है और यमुना में अधिक मात्रा में सीवेज आता है।"

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित यमुना रिवरफ्रंट में बड़े पार्क, साइकिल ट्रैक, घाट, मनोरंजन सुविधाएं और खेल मैदान विकसित किए जाएंगे। विभिन्न विभाग इन परियोजनाओं पर एक साथ काम कर रहे हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि साबरमती रिवरफ्रंट पर धोबी घाटों के पुनर्वास की तर्ज पर यमुना किनारे कपड़े धोने वाले लोगों के लिए भी अलग और बेहतर व्यवस्था की जा सकती है, ताकि नदी में सीधे गंदगी न जाए।

प्रवेश वर्मा ने भरोसा जताया कि अगला चुनाव आने से पहले दिल्ली के लोग यमुना और राजधानी में बड़ा बदलाव देखेंगे।

उन्होंने कहा, "हमने वादा किया है कि अगले चुनाव से पहले दिल्ली की जनता यमुना और दिल्ली में व्यापक बदलाव देखेगी।"

छठ पूजा को लेकर उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई का काम जारी रहने के बावजूद सरकार श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित छठ घाट उपलब्ध कराती रहेगी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बनाए गए छठ घाटों पर करीब 10 लाख लोगों ने पूजा-अर्चना की थी।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी