दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को रोकने के लिए नई तकनीकों पर विचार: मनजिंदर सिंह सिरसा
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण से निपटने के लिए नई तकनीकों और उपायों पर चर्चा करने के लिए हितधारकों के साथ एक बैठक की गई। इस बैठक में मुख्य रूप से उत्सर्जन को कम करने और हवा की गुणवत्ता की निगरानी में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सिरसा ने कहा कि चर्चा के दौरान कई बेहतरीन विचार सामने आए। इनमें श्मशान घाटों से होने वाले प्रदूषण को कम करने वाली तकनीकें और किफायती 'हाइपर-लोकल' एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंसर का इस्तेमाल शामिल है।
मंत्री ने आगे कहा, "आज एनसीआर में प्रदूषण से जुड़े एक 'इनोवेशन चैलेंज' को लेकर हितधारकों के साथ बैठक हुई। हमने ऐसे नए नवाचारों और उपायों पर चर्चा की, जो दिल्ली के प्रदूषण से निपटने में मददगार हो सकते हैं। कई अच्छे सुझाव सामने आए हैं।"
उन्होंने ऐसी तकनीकी समाधानों पर जोर दिया, जिनसे श्मशान घाटों से होने वाले उत्सर्जन को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सिरसा ने कहा कि चर्चा में आए विचारों में से एक यह था कि कैसे श्मशान घाटों से होने वाले प्रदूषण को शून्य तक लाया जाए, या उत्सर्जन को 95 प्रतिशत से अधिक कम किया जाए।
मंत्री ने स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने के लिए किफायती एयर क्वालिटी सेंसर की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब एयर क्वालिटी के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए मॉनिटरिंग सिस्टम और सस्ती सेंसर तकनीकें, दोनों ही उपलब्ध हैं।
सिरसा ने आगे कहा कि ये तकनीकें हमें प्रदूषण के स्रोतों के बारे में बहुत ही स्थानीय (हाइपर-लोकल) जानकारी जुटाने और यह पता लगाने में मदद कर सकती हैं कि प्रदूषण कहां से आ रहा है।
यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब सर्दियां करीब आने के साथ दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। सर्दियों के दौरान मौसम की स्थिति, वाहनों से निकलने वाले धुएं, धूल और अन्य कारकों की वजह से प्रदूषण का स्तर आमतौर पर बढ़ जाता है।
4 अक्टूबर को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 187 दर्ज किया गया, जो 2020 के बाद से इसी अवधि के लिए चार दिनों का सबसे अधिक औसत है। इससे एक और मुश्किल सर्दी के मौसम को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
हवा की बिगड़ती गुणवत्ता ने सांस संबंधी बीमारियों और लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इससे पहले, 29 सितंबर को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के 'वायु प्रदूषण कम करने संबंधी कार्य योजना' की समीक्षा की गई।
इस बैठक में अब तक लागू किए गए उपायों, जमीनी स्तर पर हुई प्रगति और सर्दियों के महीनों से पहले तथा उनके दौरान प्रदूषण से निपटने के लिए जरूरी अतिरिक्त कदमों का जायजा लिया गया।
इस कार्य योजना के तहत, 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' पहल को उन ईंधन स्टेशनों पर लागू किया जाएगा, जहां 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम' लगे हुए हैं।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जागरूकता अभियानों और सख्ती के ज़रिए वाहन मालिक अनिवार्य 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (पीयूसीसी) के नियमों का पालन करें।
इस योजना में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाली तोड़फोड़ की गतिविधियों और बाहरी निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल है।
--आईएएनएस
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