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दिल्ली सरकार ने फसल क्षति के लिए अनुग्रह राशि बढ़ाकर 75,000 रुपए प्रति हेक्टेयर की

 

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार ने अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान भारी बारिश और खेतों में जलभराव से प्रभावित किसानों को 75,000 रुपए प्रति हेक्टेयर की बढ़ी हुई अनुग्रह सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि कैबिनेट बैठक में लिए गए इस निर्णय से दिल्ली के 10,000 किसानों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में कुल 10,977.44 एकड़ (लगभग 4,442.41 हेक्टेयर) कृषि भूमि बारिश से प्रभावित हुई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, 2015 में तत्कालीन सरकार ने बारिश के कारण फसल क्षति के लिए 20,000 रुपए प्रति एकड़ की अनुग्रह सहायता का प्रावधान किया था। यह राशि लगभग 49,421 रुपए प्रति हेक्टेयर बनती है।

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों से अधिक समय में कृषि लागत में हुई वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, वर्तमान सरकार ने सहायता की दर बढ़ाकर 75,000 रुपए प्रति हेक्टेयर कर दी है।

उन्होंने कहा कि भारी बारिश और उसके परिणामस्वरूप खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान पहुंचने वाले किसानों को बढ़ी हुई सहायता प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय विशेष रूप से अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान अत्यधिक बारिश और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था में व्यवधान से उत्पन्न परिस्थितियों के संदर्भ में लिया गया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, यह सहायता पंजीकृत भूस्वामियों को प्रदान की जाएगी। कंपनियों के स्वामित्व वाली भूमि, ग्राम सभाओं के अधीन भूमि और स्थायी चारदीवारी से घिरी फार्महाउस भूमि इस सहायता के अंतर्गत नहीं आएगी।

उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा किए गए विस्तृत आकलन में पाया गया कि अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान भारी बारिश और जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है और फसल हानि का आकलन 100 प्रतिशत किया गया है।

इस स्थिति को देखते हुए, मंत्रिमंडल ने प्रभावित किसानों को 75,000 रुपए प्रति हेक्टेयर की पूरी दर से अनुग्रह सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। पूर्व व्यवस्था के तहत, फसल के नुकसान के अनुपात में 70 प्रतिशत तक सहायता प्रदान की जाती थी, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर पूरी सहायता देय होती थी।

उन्होंने कहा कि यह सहायता न केवल किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें अगली फसल की तैयारी करने और कृषि गतिविधियों की निरंतरता सुनिश्चित करने में भी सक्षम बनाएगी।

--आईएएनएस

एमएस/