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केवल कर्ज के आंकड़ों से आर्थिक मजबूती नहीं आंकी जा सकती: तमिलनाडु के बचाव में पी. चिदंबरम

 

चेन्नई, 1 जनवरी (आईएएनएस)। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को कहा कि किसी राज्य की आर्थिक स्थिति का आकलन केवल उसके कुल कर्ज के आधार पर करना मूल रूप से गलत है, क्योंकि इससे व्यापक आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी होती है।

नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ जारी एक बयान में चिदंबरम ने कहा कि सार्वजनिक कर्ज में बढ़ोतरी एक वैश्विक प्रवृत्ति है और इसका इस्तेमाल चुनिंदा रूप से तमिलनाडु जैसे राज्यों की आलोचना के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी हर साल कुल सार्वजनिक कर्ज बढ़ रहा है।

चिदंबरम ने कहा, “भारत में भी यही स्थिति है। देश का कुल कर्ज और सभी राज्यों का संयुक्त कर्ज हर वर्ष बढ़ता है। यह अपने आप में असामान्य नहीं है।”

पूर्व वित्त मंत्री के अनुसार, किसी राज्य की वित्तीय सेहत का सही पैमाना कुल कर्ज की राशि नहीं, बल्कि कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुपात है।

उन्होंने कहा, “यही स्वीकार्य और सार्थक मापदंड है,” और जोड़ा कि तमिलनाडु का कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात 2021-22 से 2025-26 तक स्थिर बना हुआ है।

चिदंबरम ने आगे कहा कि वित्तीय अनुमानों के अनुसार राज्य का राजकोषीय घाटा लगातार कम हो रहा है और तमिलनाडु के 2025-26 तक नीति आयोग के तीन प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, “यह एक सराहनीय उपलब्धि है और जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन को दर्शाती है।”

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि वित्तीय प्रशासन में हमेशा सुधार की गुंजाइश रहती है, लेकिन तमिलनाडु की तुलना उत्तर प्रदेश से किए जाने को उन्होंने भ्रामक और अनुचित बताया। उनका कहना था कि दोनों राज्यों की आर्थिक संरचना, राजस्व आधार और विकास की दिशा अलग-अलग है।

चिदंबरम की यह टिप्पणी कांग्रेस नेता और डेटा विश्लेषक प्रवीण चक्रवर्ती के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु के बढ़ते कर्ज की तुलना उत्तर प्रदेश से की थी। इस पर डीएमके की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी, जिसके बाद चिदंबरम ने पार्टी का रुख स्पष्ट करने और इंडिया गठबंधन के भीतर तनाव कम करने के लिए हस्तक्षेप किया।

--आईएएनएस

डीएससी