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काजीरंगा में फिर दिखा दुर्लभ घड़ियाल, वन्यजीव संरक्षण को मिली नई उम्मीद

 

गुवाहाटी, 10 मई (आईएएनएस)। असम की नदियों से विलुप्त माने जा रहे घड़ियाल को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक बार फिर देखा गया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि यह इस क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक उल्लेखनीय और उत्साहजनक क्षण है।

इस दुर्लभ दृश्य ने संरक्षणवादियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच नई उम्मीद जगा दी है। इसे राज्य के नाजुक नदी पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित और सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

काजीरंगा नेशनल पार्क एंड टाइगर रिजर्व (केएनपीटीआर) की निदेशक सोनाली घोष ने बताया कि 26 अप्रैल को पार्क के बुरापहाड़ रेंज स्थित मैते एंटी-पोचिंग कैंप क्षेत्र के पास एक घड़ियाल (गेवियलिस गैंगेटिकस) को रेत के टीले पर धूप सेंकते हुए देखा गया।उन्होंने बताया कि डिफोलू और ब्रह्मपुत्र नदी के संगम क्षेत्र में गश्त पर निकली वन विभाग की एक टीम की नजर इस घड़ियाल पर पड़ी। विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के संगम स्थल और रेतीले किनारे घड़ियालों के लिए सबसे पसंदीदा आवास होते हैं, जहां वे भोजन करते हैं, धूप सेंकते हैं और प्रजनन करते हैं।

सोनाली घोष ने कहा कि इसके बाद अगले कुछ दिनों में उसी स्थान से घड़ियाल दिखने की कई और घटनाएं सामने आईं, जिनके फोटोग्राफिक प्रमाण भी मिले। आखिरी बार 8 मई को बुरापहाड़ रेंज में पर्यटक गाइड शिशुकांत नाथ ने घड़ियाल को देखा था।

असम के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “जिस घड़ियाल को कभी असम की नदी प्रणालियों से लगभग गायब माना जा रहा था, उसका काजीरंगा में फिर से दिखना वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद खास और ऐतिहासिक पल है।”

केएनपीटीआर की निदेशक ने कहा कि यह असम की अद्भुत जैव विविधता और जंगलों, आर्द्रभूमियों तथा नदियों में लंबे समय से चल रहे संरक्षण प्रयासों की शांत लेकिन बड़ी सफलता की याद दिलाता है।

घड़ियाल एक विशेष प्रकार का मछली खाने वाला सरीसृप है, जिसकी पहचान उसकी लंबी और पतली थूथन से होती है। सोनाली घोष के अनुसार, इसकी आबादी में ऐतिहासिक रूप से 98 प्रतिशत तक गिरावट आई है और अब जंगलों में केवल लगभग 650 से 1,000 प्रजनन योग्य घड़ियाल ही बचे हैं।

उन्होंने बताया कि शेष बची जंगली आबादी (घड़ियाल) और पुनर्प्रवेश अभयारण्य राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश), कटारनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य (उत्तर प्रदेश) और गंडक नदी (बिहार) के पास स्थित हैं।

शीर्ष शिकारी और प्रमुख प्रजाति होने के नाते यह नदी के स्वास्थ्य का सूचक है, जो मछली की आबादी को नियंत्रित करने और मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

केएनपीटीआर निदेशक ने बताया कि डिब्रू सोइखोवा राष्ट्रीय उद्यान, मानस राष्ट्रीय उद्यान और असम के शिवसागर और लखीमपुर जिलों के दिखो और सुबनसिरी नदी बेसिनों से भी ब्रह्मपुत्र में घड़ियाल के कभी-कभार देखे जाने की रिपोर्ट मिली हैं।

उन्होंने कहा कि घड़ियाल ऐतिहासिक रूप से पूर्वोत्तर भारत में ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली में निवास करते थे और इस क्षेत्र की सोलह नदियों में 1950 के दशक से इनके देखे जाने के रिकॉर्ड मौजूद हैं।

प्राकृतिक स्थान के नुकसान और अन्य कारकों के कारण 1950 के दशक के बाद इस प्रजाति को वहां स्थानीय रूप से विलुप्त माना गया था, हालांकि कभी-कभार एक-दो घड़ियाल के देखे जाने की अपुष्ट रिपोर्ट मिली थीं।

घोष ने कहा कि इस तरह के देखे जाने से असम में इस सरीसृप की संभावित निरंतर उपस्थिति का संकेत मिलता है, हालांकि इस प्रजाति को स्थानीय रूप से विलुप्त माना जाता था। इन दृश्यों को असम के संरक्षित क्षेत्रों में सफल पारिस्थितिक संरक्षण और दीर्घकालिक आर्द्रभूमि संरक्षण पहलों का एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।

अधिकारी ने बताया कि काजीरंगा पार्क प्राधिकरण द्वारा वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और टर्टल सर्वाइवल अलायंस फाउंडेशन इंडिया (टीएसएएफआई) के सहयोग से किए गए हालिया सर्वेक्षणों में (जिनमें जनवरी 2026 में नदी के 160 किलोमीटर क्षेत्र में किया गया सर्वे भी शामिल है) पिछले कुछ वर्षों में एक अकेली मादा घड़ियाल की मौजूदगी दर्ज की गई है। इसके साथ ही क्षेत्र में विविध जलीय जीव भी पाए गए हैं, जिससे घड़ियालों को फिर से बसाने के प्रस्तावों को बल मिला है।

भारत का सातवां यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व अपने ‘बिग फाइव’ वन्यजीवों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इनमें एक सींग वाले भारतीय गैंडे, बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, जंगली भैंसे और पूर्वी स्वैम्प डियर शामिल हैं।

गोलाघाट, नगांव, सोनितपुर और बिस्वनाथ जिलों में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान तीन वन प्रभागों — ईस्टर्न असम वाइल्डलाइफ डिवीजन (बोकाखाट), बिस्वनाथ वाइल्डलाइफ डिवीजन (बिस्वनाथ चरियाली) और नगांव वाइल्डलाइफ डिवीजन (नगांव) में विभाजित है।

--आईएएनएस

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